लॉन्च सही, लेकिन सैटेलाइट पहुंचा कहीं और! जानें क्या हुआ Blue Origin के मिशन में

Blue Origin के New Glenn रॉकेट की लॉन्चिंग के दौरान गड़बड़ी के कारण सैटेलाइट सही ऑर्बिट में नहीं पहुंच सका।

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Written by नितेश पपनोई, अपडेटेड: 21 अप्रैल 2026 13:35 IST
ख़ास बातें
  • New Glenn रॉकेट का अपर स्टेज इंजन सही थ्रस्ट नहीं दे पाया
  • सैटेलाइट तय ऑर्बिट तक नहीं पहुंचा, मिशन को फेल माना गया
  • जांच पूरी होने तक Blue Origin ने लॉन्चिंग फिलहाल रोक दी

Photo Credit: Blue Origin

बीते वीकेंड जेफ बेजोस (Jeff Bezoz) की अंतरिक्ष कंपनी Blue Origin ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की, जब उसने पहली बार सफलतापूर्वक एक रॉकेट बूस्टर का रीयूज किया। हालांकि, इस बार लॉन्च में गड़बड़ी सामने आई है, जिसकी वजह से सैटेलाइट सही ऑर्बिट में नहीं पहुंच सका। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लॉन्च के बाद रॉकेट का अपर स्टेज तय ऊंचाई तक थ्रस्ट नहीं दे पाया, जिससे मिशन फेल हो गया। इस घटना के बाद कंपनी ने अपने न्यू ग्लेन रॉकेट की सभी लॉन्चिंग फिलहाल रोक दी हैं और जांच शुरू कर दी गई है।

यह लॉन्च रविवार को Cape Canaveral Space Force Station से किया गया था। शुरुआती स्टेज यानी फर्स्ट-स्टेज बूस्टर ने सही तरीके से काम किया और समुद्र में मौजूद बार्ज पर सफलतापूर्वक लैंड भी कर गया। लेकिन इसके बाद अपर स्टेज में दिक्कत आ गई, जिससे सैटेलाइट को सही ऑर्बिट में नहीं भेजा जा सका।

कंपनी के CEO Dave Limp के मुताबिक (via NDTV), शुरुआती डेटा से संकेत मिला है कि अपर स्टेज के एक इंजन ने पर्याप्त थ्रस्ट नहीं दिया। इसी वजह से सैटेलाइट अपनी तय ऑर्बिट तक नहीं पहुंच पाया और मिशन को सफल नहीं माना जा सका।

यह सैटेलाइट AST SpaceMobile के नेटवर्क का हिस्सा बनने वाला था, जिसका मकसद सीधे सैटेलाइट से स्मार्टफोन तक कनेक्टिविटी देना है। हालांकि अब सैटेलाइट और रॉकेट का अपर स्टेज दोनों ही पृथ्वी के वातावरण में दोबारा प्रवेश कर चुके हैं।

यह न्यू ग्लेन रॉकेट की तीसरी फ्लाइट थी, जिसे कंपनी बड़े पेलोड्स को ऑर्बिट में भेजने के लिए तैयार कर रही है। गौर करने वाली बात है कि NASA भी अपने Artemis मिशन के तहत इसी रॉकेट का इस्तेमाल चंद्रमा पर लैंडर भेजने के लिए करने की योजना बना रहा है।

करीब 98 मीटर ऊंचे इस रॉकेट का नाम John Glenn के नाम पर रखा गया है। फिलहाल कंपनी और Federal Aviation Administration मिलकर इस फेल्योर की जांच कर रहे हैं, जिसके बाद ही अगली लॉन्चिंग का फैसला लिया जाएगा।

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