अंतरिक्ष में सैटेलाइट की रिफ्यूलिंग और फैक्ट्री बनाने को तैयार है अमेरिका!

NASA के एक्सपर्ट्स का मानना है कि महंगे रॉकेट को त्यागना समझदारी का काम नहीं है।

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नितेश पपनोई, अपडेटेड: 23 जून 2022 21:00 IST
ख़ास बातें
  • NASA का मानना है कि महंगे रॉकेट को त्यागना समझदारी का काम नहीं है
  • सैटेलाइट को स्पेस में ही दोबारा फ्यूल देने के लिए इजाद कर रहे हैं तकनीक
  • सैटेलाइट की सर्विस और रखरखाव के लिए स्पेस में फैक्ट्री बनाने का भी विचार

NASA के एक्सपर्ट्स का मानना है कि महंगे रॉकेट को त्यागना समझदारी का काम नहीं है।

अमेरिकी सरकार अंतरिक्ष में मौजूद अपने महंगे हार्डवेयर का रखरखाव वहीं करने पर काम कर रही है। यहां तक कि कहा जा रहा है कि अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA अपने हार्डवेयर को पृथ्वी के बजाय अंतरिक्ष में भी बनाने पर भी विचार कर रही है। जल्द अमेरिकी सरकार और निजी फर्मों द्वारा विकसित नई टेक्नोलॉजी अंतरिक्ष में सर्विसिंग, असेंबलिंग और यहां तक ​​​​कि निर्माण करना संभव बना देगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके बाद चांद पर लंबे समय तक रहना भी मुमकिन हो जाएगा।

Quartz के अनुसार, NASA एक अंतरिक्ष यान में ईंधन भरने के लिए अपने पहले मिशन की योजना बना रहा है। एयरोस्पेस फर्म Northrop Grumman ने सैटेलाइट की लाइफ को बढ़ाने के लिए पहले ही दो मिशन शुरू किए हैं, और जल्द ही एक नए अंतरिक्ष रोबोट का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर करने के लिए करेंगे। 
रिपोर्ट कहती है कि अमेरिकी सरकार ने इस साल अप्रैल में इन टेक्नोलॉजी को विकसित करने के लिए एक राष्ट्रीय रणनीति जारी की थी, जिसका नेतृत्व अंतरिक्ष नीति सलाहकार एज़िने उज़ो-ओकोरो (Ezinne Uzo-Okoro) ने किया, जिन्होंने पहले नासा के लिए काम भी किया था।

Secure World Foundation में स्पेस पॉलिसी एक्सपर्ट ब्रायन वीडन (Brian Weeden) कहते हैं, "यह एक बड़ी बात है क्योंकि अमेरिकी सरकार के सभी विभिन्न विभाग और एजेंसियां एक साथ मिलकर इस बात पर आम सहमति बनाने में सक्षम थे कि अमेरिकी सरकार को सैटेलाइट सर्विस को कैसे बढ़ावा देना चाहिए।"

NASA के एक्सपर्ट्स का मानना है कि महंगे रॉकेट को त्यागना समझदारी का काम नहीं है। उन्होंने इस बात पर विचार किया कि क्या होगा यदि उन्हें फिर से ईंधन दिया जाए, या उन्हें रिपेयर किया जाए? और क्या होगा अगर इन कामों के लिए टूल्स भी अधिक महत्वाकांक्षी और आकर्षक ऑर्बिटल प्रोजेक्ट को जन्म देते हैं?
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नासा के टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट मैनेजर ट्रुडी कोर्टेस (Trudy Kortes) का मानना है कि किसी एसेट पर $200 मिलियन खर्च करने के बजाय उसे ऑर्बिट में ही रखते हुए अलग तरीके से उपयोगी बनाना चाहिए।

लेकिन इससे पहले कि सैटेलाइट निर्माता अपने अंतरिक्ष यान में फ्यूल पोर्ट जैसी चीजों को स्थापित करना शुरू करें, उन्हें यह आश्वस्त करने की आवश्यकता है कि इसके ऊपर लगने वाला खर्च वैल्यू रखता है या नहीं।
 

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