मार्केट में सुस्ती की वजह कमजोर कंज्यूमर डिमांड और बढ़ते आर्थिक दबाव को बताया गया है।
मार्केट में एकदम से इतनी बड़ी गिरावट का मुख्य कारण मैमोरी प्राइसेज में बढ़ोत्तरी है। (सांकेतिक फोटो)
भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में मंदी छा गई है। रिसर्च रिपोर्ट में सामने आया है कि भारत की स्मार्टफोन मार्केट में 6 साल की सबसे बड़ी मंदी इस वक्त आ चुकी है। यानी जून तिमाही में यह 6 साल का सबसे मंदा दौर है जिससे मार्केट गुजर रही है। देश में स्मार्टफोन शिपमेंट्स में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। कहा गया है कि मार्केट में यह मंदी कमजोर होती मांग के कारण है और आर्थिक दबाव इसका दूसरा बड़ा कारण है। आइए जानते हैं क्या कहते हैं ताजा आंकड़े।
भारतीय स्मार्टफोन मार्केट पिछले छह सालों में जून तिमाही के दौरान सबसे बड़ी गिरावट के दौर से गुजरी है। Counterpoint Research रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि 2026 की दूसरी तिमाही में शिपमेंट्स में साल-दर-साल (YoY) बेसिस पर 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। मार्केट में सुस्ती की वजह कमजोर कंज्यूमर डिमांड और बढ़ते आर्थिक दबाव को बताया गया है। और ये हाल भी तब कहे गए हैं जब ब्रांड्स ने डिस्काउंट और फाइनेंसिंग ऑफर्स की भरमार रखी थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्केट में एकदम से इतनी बड़ी गिरावट का मुख्य कारण मैमोरी प्राइसेज में बढ़ोत्तरी है। इसके कारण फोन निर्माताओं को हरेक सेग्मेंट में कीमतें बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ा। इसका सीधा असर ग्राहकों का नई स्मार्टफोन खरीदारी से मुंह मोड़ने के रूप में नजर आया। रिसर्च फर्म का अनुमान है कि तिमाही के आखिर तक स्मार्टफोन की औसत कीमतों में लगभग 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, क्योंकि ब्रांड्स ने कंपोनेंट्स की बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल दिया।
मार्केट की स्थितियों पर सीनियर एनालिस्ट प्राचीर सिंह का कहना है कि जून वाली तिमाही में भारतीय स्मार्टफोन मार्केट दबाव में रही क्योंकि मांग और सप्लाई दोनों पर बुरा असर पड़ा। सप्लाई के मोर्चे पर देखें तो मैमोरी और दूसरे कंपोनेंट्स की लागत में लगातार बढ़ोतरी हुई। जिसके कारण लगभग हर बड़ी ओरिजनल इक्विपमेंट निर्माता (OEM) कंपनी को कई बार कीमतें बढ़ानी पड़ीं। इसी के चलते दूसरी तिमाही के आखिर तक स्मार्टफोन की औसत कीमतों में लगभग 15% की बढ़ोतरी हुई।
रिपोर्ट कहती है कि 15 हजार रुपये और उससे नीचे के सेग्मेंट पर सबसे बुरा असर पड़ा है। इस सेग्मेंट से सबसे ज्यादा कमी शिपमेंट्स में देखी गई जो कि 45% के करीब बताई गई है। अधिकतर चाइनीज ब्रांड्स की मौजूदगी मुख्य रूप से एंट्री-लेवल और मिड-टियर सेगमेंट में है। इसलिए 2020 के बाद से दूसरे कैलेंडर क्वार्टर में उनका कुल मार्केट शेयर गिरकर सबसे निचले स्तर पर आ गया है। स्थिति को बिगड़ता देख कई OEM कंपनियों ने मास-मार्केट सेगमेंट में अपने 4G पोर्टफोलियो का विस्तार किया ताकि सस्ते स्मार्टफोन खरीदने वाले ग्राहकों के लिए विकल्प मौजूद रहें।
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हेमन्त कुमार Gadgets 360 में सीनियर ...और भी