फ्रांस में सैकड़ों ग्रोसरी स्टोर्स में हैकर्स ने रेफ्रिजरेटर्स को हैक करके कंट्रोल ले लिया और तापमान में गड़बड़ी कर दी।
सुपरमार्केट में फ्रिज और फ्रीजर को ऐसे कंट्रोलर से चलाया जाता है, जिन्हें ऑनलाइन आसानी से एक्सेस कर सकते हैं।
Photo Credit: Pexels/freestocks.org
फ्रांस में हैकर्स ने एक अजीबोगरीब कारनामा किया, जिससे सभी को हैरानी और चिंता हो रही है। दरअसल फ्रांस में सैकड़ों ग्रोसरी स्टोर्स में हैकर्स ने रेफ्रिजरेटर्स को हैक करके कंट्रोल ले लिया और तापमान में गड़बड़ी कर दी। इसके बाद रेफ्रिजरेटर में मौजूद सामान खराब होने लगा। यह घटना बताती है कि इंटरनेट से जुड़ा सामान कितना बड़ा खतरा बन सकता है। फ्रांस में अधिकारियों और नेताओं दोनों को इस घटने के बाद से चिंता सता रही है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
देशभर में हुए इस साइबर अटैक में करीबन 700 से ज्यादा फूड रिटेलर्स प्रभावित हुए। इस अटैक में हैकर्स ने रेफ्रिजरेटर इक्विपमेंट को रिमोट स्तर पर कंट्रोल किया और डीफ्रोस्ट साइकल को चालू किया। इस दौरान हैकर्स ने रेफ्रिजरेटर और फ्रीजर को 50 डिग्री जैसे अधिकतम तापमान पर चलाया। इसके चलते ताजा और फ्रोजन सामान खराब होने लगा। यहां तक कि कई इक्विपमेंट भी पिघलने लगे। फ्रांस में संबंधित अधिकारियों ने इस पर जांच शुरू कर दी है और देश में अर्थव्यवस्था मंत्री रोलैंड लेस्क्योर ने इस घटना को सभी के लिए एक वेक-अप कॉल बताया। इस अटैक से सुपरमार्केट मालिकों को बहुत ज्यादा नुकसान हुआ।
सुपरमार्केट में फ्रिज और फ्रीजर को ऐसे कंट्रोलर से चलाया जाता है, जिन्हें ऑनलाइन आसानी से एक्सेस कर सकते हैं। इसके चलते रेफ्रिजरेटर मेंटेनेंस कंपनियां रिमोट लेवल पर टेंप्रेचर को कम या ज्यादा कर सकती हैं। इस घटना में हैकर्स ने डैनफॉस, कोपलैंड और डिक्सैल जैसी कंपनियों के कंट्रोलर को हैक कर लिया था। साइबर अटैक होने के बाद डैनफॉस को पता चला कि कई यूनिट्स जो इस अटैक में प्रभावित हुईं थी उन्हें सॉफ्टवेयर या सिक्योरिटी अपडेट नहीं मिल रहे थे और इसके अलावा वो पुराने सॉफ्टवेयर पर चल रहे थें। इसके लिए ग्राहकों को सलाह दी गई है कि उन्हें सपोर्टेड सिस्टम को लेटेस्ट फर्मवेयर के साथ अपडेट रखना है।
किसने हैक किया
इन रेफ्रिजरेटर पर हुए साइबर अटैक के पीछे की वजह अभी पता नहीं लगी है, क्योंकि किसी भी ग्रुप या व्यक्ति ने इस अटैक की जिम्मेदारी नहीं ली है। हालांकि, फ्रेंच साइबर-सिक्योरिटी फर्म Sekoia के चीफ थ्रेट रिसर्चर फेलिक्स एमे का कहना है कि फिलहाल पता नहीं चला कि हैकर्स ने ऐसा क्यों किया। अभी तक किसी ने भी सार्वजनिक स्तर पर इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है। अभी फ्रांस की नेशनल साइबर एजेंसी ANSSI इस मामले की जांच कर रही है। ऐसी भी संभावना हो सकती है कि किसी अकेले हैकर या हैक्टिविस्ट ग्रुप ने यह अटैक किया हो, क्योंकि कई बार कुछ आर्थिक गतिविधियों या इंफ्रास्ट्रक्चर को बाधित करने के लिए भी ऐसे अटैक किए जा सकते हैं।
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