Apple और Google ने कई वर्षों के लिए साझेदारी की है, जिसमें गूगल का Gemini AI मॉडल कई नए Siri फीचर्स को पावर प्रदान करेगा।
Apple और Google ने कई वर्षों के लिए साझेदारी की है।
Photo Credit: Unsplash/Laurenz Heymann
Apple और Google ने कई वर्षों के लिए साझेदारी की है, जिसमें गूगल का Gemini AI मॉडल कई नए Siri फीचर्स को पावर प्रदान करेगा। नया Siri इस साल लॉन्च होने की उम्मीद है। इस साझेदारी से एप्पल के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्ट्रैटजी में बदलाव हो रहा है। कंपनी ने अपने खुद के एआई मॉडल को पूरी तरह खुद तैयार करने के बजाय गूगल के एआई बेस पर काम करने का फैसला लिया है। आइए जानते हैं कि गूगल कैसे काम करेगा और कैसे सिरी एडवांस होगा और iPhone यूजर्स के डाटा के साथ क्या बदलाव होगा।
रिपोर्ट के अनुसार, इस डील के तहत Apple एडवांस सिरी फीचर्स जैसे कि पर्सनलाइजेशन, कंवर्सेशन और एआई बेस्ड टास्क का सपोर्ट करने के लिए Google Gemini AI मॉडल का उपयोग करेगा। Google बेसिक एआई टेक्नोलॉजी प्रदान करेगा, वहीं iPhone, iPad और Mac के लिए मॉडल को डिप्लॉय, इंटीग्रेट और कस्टमाइज करने का कंट्रोल एप्पल के पास रहेगा।
Apple का प्राइवेट क्लाउड कंप्यूट सिस्टम इसका अहम हिस्सा है। यह Apple इंटेलिजेंस फीचर्स को गूगल के पब्लिक क्लाउड के बजाय सीधे डिवाइस पर या एप्पल के अपने सर्वर पर चलाने की सुविधा देता है। Google के एआई मॉडल एप्पल के बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर के अंदर काम करेंगे, जिसका मतलब है कि अधिकतर स्थितियों में कंप्यूटिंग को मैनेज गूगल नहीं बल्कि एप्पल करेगा।
Apple इस बात पर जोर दे रहा है कि यूजर्स की प्राइवेसी प्रोटेक्शन में कोई बदलाव नहीं हुआ है। Siri द्वारा प्रोसेस किया गया iPhone यूजर्स का डाटा सीधे Google को नहीं भेजा जाएगा। इसके बजाय Gemini मॉडल Apple के कंट्रोल माहौल में काम करेंगे। वहीं Apple अपने खुद के प्राइवेसी, एन्क्रिप्शन और डाटा-मिनिमाइजेशन नियमों का पालन करता है।
Apple आटोमैटिक तौर पर Google के साथ यूजर्स का निजी डाटा साझा नहीं करता है। Siri रिक्वेस्ट को Apple के प्राइवेसी फ्रेमवर्क के तहत प्रोसेस किया जाता है। डिफॉल्ट तौर पर Google अपने पब्लिक AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए डाटा का उपयोग नहीं करता है।
हालांकि, यूजर्स को बेहतर फीचर्स के लिए सीधे Gemini के साथ प्रॉम्प्ट शेयर करने का ऑप्शन मिल सकता है। अगर कोई यूजर्स अपनी सहमति देता है तो Google को उन प्रॉम्प्ट से संबंधित लिमिटेड डाटा मिल सकता है जो Google की अपनी AI और डाटा पॉलिसी के तहत है। ऐसी उम्मीद है कि Apple इस तरह की किसी भी शेयरिंग से पहले यूजर्स को साफतौर पर नोटिफाई करेगा और उनसे अनुमति लेगा।
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