AI Labelling: AI से कंटेंट बनाना आसान नहीं होगा! सरकार लाई नया प्रस्ताव, 7 मई तक डेडलाइन

फेक कंटेंट पर शिकंजा जोर से कसने वाला है। 7 मई तक मंत्रालय ने इसे लेकर सुझाव मांगे हैं।

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Written by हेमन्त कुमार, अपडेटेड: 22 अप्रैल 2026 15:35 IST
ख़ास बातें
  • इससे फेक कंटेंट पर शिकंजा जोर से कसने वाला है।
  • AI से बने कंटेंट पर अब लेबल लगाना जरूरी होगा।
  • प्रस्ताव को लेकर मंत्रालय की ओर से सुझाव मांगे गए हैं।

इंटरनेट पर AI के जमाने में किसी फोटो-वीडियो की मौलिकता को साबित करना बहुत ही मुश्किल काम हो गया है।

Photo Credit: Freepik

AI के आने के कंटेंट बनाना काफी सरल हो गया है। लेकिन सरलता के साथ-साथ दुरुपयोग भी बढ़ा है। काफी समय से डीप फेक वीडियो को लेकर बहस जारी है। इंटरनेट पर AI के जमाने में किसी फोटो-वीडियो की मौलिकता को साबित करना बहुत ही मुश्किल काम हो गया है। इसलिए सरकार ने AI के दुरुपयोग पर लगाम लगाने के लिए अब नियम और भी सख्त कर दिए हैं। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से नया प्रस्ताव जारी किया गया है जो AI द्वारा बनाए गए कंटेंट पर नियमों को सख्ती से लागू करने की सिफारिश करता है। 

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने नया प्रस्ताव पेश किया है जो कहता है कि AI से बने कंटेंट पर अब लेबल लगाना जरूरी होगा। यह पहले से अधिक स्पष्ट रूप से लिखा हुआ होना चाहिए। साथ ही AI से बनने कंटेंट की पूरी अवधि तक अब यह लेबल दिखाना अनिवार्य होगा। प्रस्ताव को लेकर मंत्रालय की ओर से सुझाव मांगे गए हैं। जनता के सुझाव आने के पश्चात् इस प्रस्ताव पर मुहर लग सकती है। अगर प्रस्ताव लागू होता है तो AI कंटेंट बनाना पहले से अधिक मुश्किल हो सकता है, इससे फेक कंटेंट पर शिकंजा जोर से कसने वाला है। 7 मई तक मंत्रालय ने इसे लेकर सुझाव मांगे हैं। 

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प्रस्ताव के पारित होने के बाद एआई से तैयार या सिंथेटिक कंटेंट को लेकर नियम बेहद सख्त होने वाले हैं। AI कंटेंट पर लगातार और स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाला लेबल लगाना अनिवार्य होने वाला है। नए नियम लागू होने के बाद वीडियो, इमेज या किसी भी विजुअल फॉर्मेट में AI से तैयार कंटेंट को जाहिर करना एक अनिवार्यता हो जाएगी और किसी भी प्रकार के कंटेंट को छुपाया नहीं जा सकेगा। 

कंटेंट क्रिएटर्स पर अब पहले से ज्यादा दबाव बढ़ने वाला है चाहे इसमें कंपनी हो या कोई व्यक्ति। एआई से बने वीडियो में लेबल का मतलब है कि देखने वाले को पता चलना चाहिए जो कंटेंट वह देख रहा है वह वास्तविक है या सिर्फ एआई से बनाया गया है। एआई कंटेंट का वॉटरमार्क हटाना अब नियमों के उल्लंघन के दायरे में आता है। नए नियमों के मुताबिक, सोशल मीडिया कंपनियों को शिकायत मिलने के 3 घंटे के भीतर आपत्तिजनक सामग्री को हटाना होगा। यह समय पहले 36 घंटे का होता था। 
 

 

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ये भी पढ़े: AI labelling, AI labelling rule, MeitY

हेमन्त कुमार Gadgets 360 में सीनियर ...और भी

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