कंपनी का अनुमान है कि 2035 तक AI-पावर्ड एजेंट दुनिया भर में 90% AI टोकन ट्रैफिक पर राज कर रहे होंगे।
Photo Credit: Huawei Central
चीन की कंपनी Huawei ने एक चौंकाने वाली रिपोर्ट जारी की है जिसमें AI को लेकर बड़ी बात कही गई है। कंपनी का अनुमान है कि 2035 तक AI-पावर्ड एजेंट दुनिया भर में 90% AI टोकन ट्रैफिक पर राज कर रहे होंगे। यानी AI संबंधित जितनी भी गतिविधियां ऑनलाइन हो रही होंगी उनमें से 90% को AI एजेंट ही संभाल रहे होंगे। "इंटेलिजेंट वर्ल्ड 2035: टर्निंग विज़न इनटू एक्शन" (Intelligent World 2035: Turning Vision into Action) नाम की इस रिपोर्ट में हुवावे ने बताया है कि कैसे AI एजेंट टेक की दुनिया में एक नया चर्चित शब्द बन रहे हैं और 2035 तक 90% ट्रैफिक के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा यह सामने आया कि AI एजेंट्स की संख्या इंसानों की आबादी से भी 100 गुना हो चुकी होगी। कंपनी ने कहा है कि 2035 तक AI एजेंट्स की संख्या 900 अरब होगी! Reuters के अनुसार, Huawei ने 2035 तक ग्लोबल AI टोकन ट्रैफिक में ऑटोनॉमस एजेंट्स की हिस्सेदारी का अनुमान 90% से भी अधिक बताया है। यानी AI टोकन ट्रैफिक इन एजेंट्स के ही कंट्रोल में होगा।
ज्यादातर डिजिटल फैसले लेने और प्रोसेसिंग का काम AI द्वारा ही किया जाएगा। या यूं कहें कि हमारा सिस्टम AI के हाथों में जा चुका होगा। इसमें मनुष्य की हिस्सेदारी या हस्तक्षेप बहुत कम रह जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके लिए अभी से इंतजाम करने होंगे। क्योंकि इतने बड़े ट्रैफिक को मैनेज करने के लिए कंप्यूटिंग पावर में भारी बढ़ोतरी करनी होगी। इसी के साथ-साथ ऐसे नए सिस्टम की भी जरूरत होगी जो स्वतंत्र सॉफ्टवेयर को सुरक्षित और कंट्रोल में रख सकें।
चीन की टेक और टेलीकॉम कंपनी का कहना है कि अगले दशक में AI टोकन की सालाना खपत तेजी से बढ़ेगी। AI टोकन ऐसे टोकन या यूनिट्स होते हैं जिन्हें AI मॉडल जानकारी पाने और बनाने के दौरान प्रोसेस करते हैं। इनकी सालाना खपत तेजी से बढ़ने वाली है क्योंकि एजेंट्स लगातार अपने आस-पास के माहौल को समझेंगे। जैसे जैसे एआई की मैमोरी डेवलप होगी, वे अपने फैसले सोच समझकर लेने लगेंगे और साथ ही बाहरी टूल्स का इस्तेमाल भी बखूबी सीख चुके होंगे। यानी वे इंसानों की तरह फैसला लेना सीख चुके होंगे और उनको किसी टूल की जरूरत होगी तो उनको उसका इस्तेमाल भी आता होगा।
कंपनी ने यह रिपोर्ट अपने पिछले अनुमान के आधार पर तैयार की है, जिसके मुताबिक 2035 तक दुनिया भर में 900 अरब AI एजेंट उपलब्ध हो सकते हैं। AI की रफ्तार को लेकर एक व्यापक खाई अब दुनिया के देशों में दिखने लगी है। जहाँ अमेरिकी टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री का एक हिस्सा इस बात पर बहस कर रहा है कि नई और एडवांस क्षमताओं के विकास की रफ्तार पर किस तरह मिलकर सीमाएं तय की जाएं, वहीं चीन ने आम तौर पर अपनी पूरी अर्थव्यवस्था में AI को तेजी से शामिल करने की कोशिश की है। मगर देश ने AI इस्तेमाल के उभरते जोखिमों को देखते हुए तकनीकी मानक भी तैयार किए हैं।
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