AI से काम आसान, लेकिन दिमाग को लग रही “शॉर्टकट” की आदत! स्टडी में बड़ा खुलासा

नई स्टडी में सामने आया है कि AI का इस्तेमाल सोचने की क्षमता और धैर्य को प्रभावित कर सकता है।

विज्ञापन
Written by नितेश पपनोई, अपडेटेड: 17 अप्रैल 2026 20:17 IST
ख़ास बातें
  • 10 मिनट AI इस्तेमाल से सोचने की क्षमता प्रभावित होती है: स्टडी
  • AI के बाद बिना मदद के परफॉर्मेंस गिरने का दावा
  • आसान जवाब से पर्सिस्टेंस यानी धैर्य कम हो सकता है

Photo Credit: AI Generated

AI टूल्स आज काम को तेज और आसान बनाने के लिए तेजी से इस्तेमाल हो रहे हैं, लेकिन एक नई स्टडी ने इस ट्रेंड पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ 10 मिनट तक AI की मदद लेने से लोगों की सोचने की क्षमता और किसी समस्या पर टिके रहने की आदत पर असर पड़ सकता है। यह स्टडी दिखाती है कि जहां AI तुरंत जवाब देकर मदद करता है, वहीं यह यूजर्स की खुद से सोचने और कोशिश करने की क्षमता को कम कर सकता है।

इस रिसर्च में 1,200 से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया, जहां उनसे मैथ रीजनिंग और रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन से जुड़े सवाल हल करवाए गए। नतीजों में सामने आया कि जब लोगों को AI की मदद मिलती है, तो वे उस समय बेहतर परफॉर्म करते हैं। लेकिन जब वही लोग बाद में बिना AI के काम करते हैं, तो उनकी परफॉर्मेंस गिर जाती है और वे जल्दी हार मानने लगते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, यह बदलाव लंबे समय के इस्तेमाल के बाद नहीं, बल्कि सिर्फ 10 मिनट के छोटे इंटरैक्शन के बाद ही देखा गया। यानी AI का असर बहुत जल्दी शुरू हो सकता है।

स्टडी में यह भी बताया गया कि सोचने की प्रक्रिया में आने वाली कठिनाई या “मेंटल फ्रिक्शन” असल में सीखने का हिस्सा होती है। जब हम किसी समस्या को खुद हल करने की कोशिश करते हैं, तो वही प्रोसेस हमें बेहतर बनाती है। लेकिन AI इस प्रोसेस को छोटा कर देता है और सीधे जवाब दे देता है, जिससे यूजर को बिना मेहनत के समाधान मिल जाता है।

रिसर्चर्स का कहना है कि यह “फ्रिक्शनलेस थिंकिंग” यानी बिना मेहनत के सोचने की आदत, लंबे समय में दिमाग की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। इससे यूजर्स में समस्या को खुद सुलझाने की इच्छा और धैर्य कम हो सकता है।

इस तरह के असर पहले भी अलग-अलग फील्ड में देखे जा चुके हैं। उदाहरण के तौर पर, कुछ प्रोफेशनल्स में यह पाया गया कि जब AI टूल्स हटाए गए, तो उनकी परफॉर्मेंस पहले से भी नीचे चली गई। इसे “AI rebound” कहा जाता है, जहां टेक्नोलॉजी पर निर्भरता हटने के बाद काम और खराब हो जाता है।

एक और अहम बात यह सामने आई कि “पर्सिस्टेंस” यानी किसी समस्या पर टिके रहने की क्षमता कोई जन्म से मिलने वाली चीज नहीं, बल्कि एक आदत है जो प्रैक्टिस से बनती है। लेकिन अगर हर बार जवाब आसानी से मिल जाए, तो यह आदत धीरे-धीरे खत्म हो सकती है।

हालांकि, एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि AI का इस्तेमाल पूरी तरह गलत नहीं है। अगर इसे सही तरीके से, यानी एक टूल या मदद के रूप में इस्तेमाल किया जाए, तो यह सोचने की प्रक्रिया को बेहतर भी बना सकता है। लेकिन अगर इसका इस्तेमाल हर सवाल का सीधा जवाब पाने के लिए किया जाए, तो यह लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकता है।

लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स 360 एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें।

Nitesh has almost seven years of experience in news writing and reviewing tech ...और भी
Advertisement
Popular Brands
#ट्रेंडिंग टेक न्यूज़
  1. Realme 16x जल्द होगा भारत में लॉन्च, BIS पर हुई लिस्टिंग
  2. Samsung का 42 हजार वाला स्मार्टफोन हुआ 6 से भी ज्यादा सस्ता, यहां आया ऑफर
#ताज़ा ख़बरें
  1. Bitcoin की सबसे बड़ी कॉरपोरेट होल्डर को लगा झटका, प्राइस गिरने से अरबों डॉलर का नुकसान
  2. Redmi भारत में ला रही पावरफुल डिवाइस, Amazon पर टीजर से मची हलचल!
  3. Motorola Razr Fold जल्द होगा भारत में लॉन्च, 50 मेगापिक्सल का Sony प्राइमरी कैमरा 
  4. Prime Video पर दिखेगा MX Player का कंटेंट, फ्री और पेड शो एक जगह!
  5. नासा ने दिया 2 एस्टरॉयड के लिए अलर्ट, आज होगा पृथ्वी से सामना!
  6. Realme 16x जल्द होगा भारत में लॉन्च, BIS पर हुई लिस्टिंग
  7. WhatsApp में आया Business AI, ऑटोमेटेड चैट और कस्टमर सपोर्ट में होगी मदद
  8. 10,400mAh बैटरी, फिर भी दुनिया का सबसे पतला फ्लैगशिप टैबलेट! Huawei MatePad Pro Max हुआ लॉन्च
  9. Amazon Great Summer Sale में iQOO 15, 15R, iQOO Z11x जैसे फोन 11 हजार तक सस्ते खरीदें! धमाका डील्स
  10. Vodafone idea ने PhysicsWallah के साथ Vi Edu+ प्रीपेड प्लान किया लॉन्च, जानें सबकुछ
Download Our Apps
Available in Hindi
© Copyright Red Pixels Ventures Limited 2026. All rights reserved.