Gen-Z के बनाए ड्रोन्स ने जीता PM Modi का दिल, ISRO का 'Mars' चैलेंज हुआ वायरल

PM Modi ने मन की बात के 128वें एपिसोड में इसरो की उस ड्रोन प्रतियोगिता का जिक्र किया, जिसमें युवाओं ने मंगल जैसी मुश्किल परिस्थितियों में ड्रोन उड़ाने की चुनौती स्वीकार की।

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Written by नितेश पपनोई, अपडेटेड: 1 दिसंबर 2025 11:34 IST
ख़ास बातें
  • PM Modi ने ISRO के ड्रोन चैलेंज में युवाओं की मेहनत सराही
  • मंगल जैसी परिस्थितियों में GPS बिना ड्रोन उड़ाने की चुनौती
  • असफलताओं से सीखना ही विकसित भारत की असली ताकत: PM Modi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने रविवार को प्रसारित हुए ‘मन की बात' (Mann ki Baat) के 128वें एपिसोड में देश के युवाओं की वैज्ञानिक जिज्ञासा के बारे में बात की। इस बार उनका फोकस ISRO की एक अनोखी ड्रोन प्रतियोगिता पर था, जिसने हाल ही में सोशल मीडिया पर खूब चर्चा भी बटोरी। पीएम मोदी ने बताया कि प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेने वाले Gen-Z प्रतिभागियों का उत्साह और लगातार कोशिशें उन्हें बेहद प्रभावित कर गईं और यही ऊर्जा भारत के वैज्ञानिक भविष्य का आधार है।

अपने रेडियो प्रोग्राम में उन्होंने जिस वीडियो का जिक्र किया, उसमें युवा छात्र मंगल ग्रह जैसी कठिन परिस्थितियों में ड्रोन उड़ाने की कोशिश करते दिखाई दे रहे थे। प्रधानमंत्री ने समझाया कि मंगल पर GPS काम नहीं करता, इसलिए ड्रोन को अपने कैमरे, विजुअल संकेतों और इनबिल्ट एल्गोरिद्म पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में ऊंचाई का अंदाज लगाना, सतह के पैटर्न को पहचानना और बाधाओं से बचते हुए खुद को स्टेबल रखना बेहद चुनौतीपूर्ण काम बन जाता है। यही वजह रही कि कई ड्रोन बैलेंस खोते दिखे, कुछ तो तुरंत ही जमीन से टकरा गए।

पीएम ने यह भी बताया कि वीडियो में महाराष्ट्र के पुणे से शामिल एक टीम लगातार असफल होने के बाद अंततः आर्टिफिशियल Mars की सतह पर कुछ सेकंड्स की सफल उड़ान भरने में कामयाब हुई। उनके मुताबिक इस जिद ने उन्हें चंद्रयान-2 की असफल लैंडिंग के बाद के पलों को याद दिलाया, जिसमें ISRO वैज्ञानिकों ने हार न मानते हुए अपनी उम्मीद कायम रखी थी और इसी उम्मीद ने Chandrayaan-3 की ऐतिहासिक सफलता का रास्ता तैयार किया। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले युवाओं की आंखों में उन्हें वही चमक और भरोसा दिखाई दिया जो दशकों से भारतीय वैज्ञानिकों की पहचान रहा है। उन्होंने जोर दिया कि नई पीढ़ी की यही वैज्ञानिक सोच और सीखने-समझने की जिद “विकसित भारत” की दिशा में बड़ा योगदान दे रही है।

हाल के वर्षों में ISRO ने युवाओं को स्पेस-टेक्नोलॉजी से जोड़ने के लिए कई कंपिटीशन और चैलेंज शुरू किए हैं। मार्स-लाइक ड्रोन चैलेंज भी इसी का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य विजुअल-नेविगेशन, ऑटोनॉमस फ्लाइट और AI-बेस्ड कंट्रोल जैसी उभरती तकनीकों में युवाओं की पकड़ मजबूत करना है।

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ये भी पढ़े: Mann Ki Baat, PM Modi, Narendra Modi, ISRO, drone, Mars
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