Magnetic Cooling एक ऐसी तकनीक है जो चुंबकीय क्षेत्र की मदद से कूलिंग पैदा करती है। एक्सपर्ट्स इसे भविष्य की ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण के अनुकूल कूलिंग टेक्नोलॉजी मानते हैं।
Magnetic Cooling तकनीक चुंबकीय क्षेत्र की मदद से कूलिंग पैदा करती है
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गर्मी के मौसम में एसी, फ्रिज और कूलर हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वैज्ञानिक ऐसी कूलिंग टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं, जिसमें न तो पारंपरिक रेफ्रिजरेंट गैस की जरूरत होती है और न ही बड़े कंप्रेसर की? इस तकनीक का नाम है Magnetic Cooling या Magnetic Refrigeration। कई एक्सपर्ट्स इसे भविष्य की कूलिंग तकनीक मानते हैं, क्योंकि यह पारंपरिक रेफ्रिजरेशन सिस्टम की तुलना में ज्यादा एनर्जी-एफिशिएंट और पर्यावरण के लिए बेहतर मानी जाती है। फिलहाल यह तकनीक आम घरों तक नहीं पहुंची है, लेकिन दुनिया भर में इस पर लगातार रिसर्च जारी है।
Magnetic Cooling एक ऐसी तकनीक (via Nature.com) है जो Magnetocaloric Effect पर आधारित है। सरल शब्दों में कहें तो कुछ खास धातुएं या मैग्नेटिक मटेरियल चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) मिलने पर गर्म हो जाते हैं और चुंबकीय क्षेत्र हटाने पर ठंडे हो जाते हैं। इसी गुण का इस्तेमाल कूलिंग जनरेट करने के लिए किया जाता है।
आज ज्यादातर फ्रिज और एयर कंडीशनर Vapor Compression Technology पर काम करते हैं। इनमें कंप्रेसर और रेफ्रिजरेंट गैस का इस्तेमाल होता है। दूसरी तरफ Magnetic Cooling में कूलिंग पैदा करने के लिए चुंबकीय क्षेत्र और खास मटेरियल का उपयोग किया जाता है। इस वजह से इसमें कम मूविंग पार्ट्स होते हैं और पारंपरिक रेफ्रिजरेंट गैस की जरूरत भी नहीं पड़ती।
इस तकनीक को लेकर वैज्ञानिकों की रुचि की कई वजहें हैं।
हालांकि मैग्नेटिक कूलिंग टेक्नोलॉजी को लेकर काफी उम्मीदें हैं, लेकिन इसे बड़े पैमाने पर अपनाने में अभी कई चुनौतियां मौजूद हैं। इसके लिए खास Magnetocaloric Materials की जरूरत होती है, जिनकी लागत और उपलब्धता अभी भी एक बड़ी चुनौती है। इसके अलावा व्यावसायिक स्तर पर बड़े और सस्ते सिस्टम डेवलप करना भी आसान नहीं है। इसी वजह से यह तकनीक अभी रिसर्च और सीमित कमर्शियल इस्तेमाल के फेज में है।
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