भारत-पाक तनाव के बीच साइबर अटैक का खतरा: इन तरीकों से रखें खुद को सुरक्षित

भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे ताजा तनाव में जरूरी है कि हम न सिर्फ फिजिकली बल्कि डिजिटल तौर पर भी खुद को तैयार रखें। नीचे कुछ ऐसे आसान लेकिन बेहद जरूरी स्टेप्स जो इस डिजिटल वॉर से आपकी सुरक्षा कर सकते हैं।

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Written by नितेश पपनोई, अपडेटेड: 9 मई 2025 11:03 IST
ख़ास बातें
  • हर प्लेटफॉर्म पर एक जैसा पासवर्ड रखने की आदत को अभी छोड़ दें
  • जहां भी संभव हो, 2FA को ऑन करें
  • कोई भी अंजान ईमेल, मैसेज या WhatsApp लिंक न खोलें

Photo Credit: Pexels

भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे ताजा तनाव ने हर किसी को सतर्क कर दिया है। जहां एक ओर बॉर्डर पर एक्टिविटीज बढ़ गई हैं, वहीं दूसरी तरफ साइबर स्पेस में भी हलचल तेज हो चुकी है। ऐसे हालातों में साइबर अटैक की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। खासतौर पर आम नागरिकों, सरकारी वेबसाइट्स और निजी डाटा पर हमले की आशंका सबसे ज्यादा होती है। हाल ही में पाकिस्तानी साइबर क्रिमिनल्स ने भारतीय डिफेंस वेबसाइट्स को हैक किया था, जिसमें उसके दावे अनुसार, 1600 से लोगों की निजी जानकारी को भी चुराया गया।

ऐसे में जरूरी है कि हम न सिर्फ फिजिकली बल्कि डिजिटल तौर पर भी खुद को तैयार रखें। आइए जानते हैं कुछ ऐसे आसान लेकिन बेहद जरूरी स्टेप्स जो इस डिजिटल वॉर से आपकी सुरक्षा कर सकते हैं:
 

1. मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें

हर प्लेटफॉर्म पर एक जैसा पासवर्ड रखने की आदत को अभी छोड़ दें। एक मजबूत पासवर्ड वो होता है जिसे क्रैक करना आसान न हो, यानी उसमें अपर केस, लोअर केस, नंबर और स्पेशल कैरेक्टर्स का कॉम्बिनेशन जरूरी है। कोशिश करें कि हर अकाउंट के लिए अलग-अलग पासवर्ड बनाएं। अगर इतने सारे पासवर्ड याद रखना मुश्किल लगे, तो पासवर्ड मैनेजर की मदद लें। इससे आपके अकाउंट्स एकदम सुरक्षित और व्यवस्थित रहेंगे।
 

2. टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) को करें एक्टिव

सिर्फ पासवर्ड अब काफी नहीं है। इसलिए जहां भी संभव हो, 2FA को ऑन करें। इससे जब भी कोई आपके अकाउंट में लॉगिन करने की कोशिश करेगा, तो एक अतिरिक्त कोड या OTP मांगा जाएगा जो सिर्फ आपके पास होगा। यह खासतौर पर ईमेल, सोशल मीडिया, बैंकिंग और क्लाउड स्टोरेज जैसी सर्विसेज के लिए बेहद जरूरी है। यह एक छोटा सा स्टेप है, लेकिन इसका सिक्योरिटी पर बड़ा असर होता है।
 

3. फेक मैसेज और ईमेल से सावधान रहें

फिशिंग अटैक्स साइबर हमलों का सबसे कॉमन हथियार हैं। अक्सर फर्जी लिंक या अटैचमेंट्स भेजकर हैकर्स आपके डिवाइस में मालवेयर डालने की कोशिश करते हैं। कोई भी अंजान ईमेल, मैसेज या WhatsApp लिंक खोलें ही न, खासकर अगर वह किसी सरकारी संस्था या बैंक के नाम पर हो। किसी भी मेल की ऑथेंटिसिटी चेक करना सीखिए, जैसे कि उसका ईमेल एड्रेस, लिंक की स्पेलिंग और उस पर दिए गए कॉल टू एक्शन।
 

4. सॉफ्टवेयर और ऐप्स को अपडेट रखें

अक्सर हम नोटिफिकेशन देखकर अपडेट को टाल देते हैं, लेकिन यही आपकी सबसे बड़ी गलती हो सकती है। पुराने वर्जन में सिक्योरिटी वीकनेस होती हैं जिन्हें साइबर अटैकर आसानी से पहचान लेते हैं। हर अपडेट सिर्फ फीचर्स के लिए नहीं होता, उसमें सिक्योरिटी पैच भी होते हैं। इसलिए OS, ऐप्स, ब्राउजर और एंटीवायरस सभी को समय-समय पर अपडेट करते रहना आपकी डिजिटल सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।
 

5. पब्लिक Wi-Fi से बचें

फ्री Wi-Fi जितना आकर्षक लगता है, उतना ही खतरनाक भी हो सकता है। ऐसे नेटवर्क्स में आपके डेटा को आसानी से इंटरसेप्ट किया जा सकता है। अगर आपको किसी कैफे, मॉल या एयरपोर्ट पर इंटरनेट यूज करना ही है, तो पर्सनल डेटा एक्सेस से बचें और VPN का इस्तेमाल करें। VPN आपके डेटा को एनक्रिप्ट कर देता है, जिससे आपकी प्राइवेसी बनी रहती है। आज के समय में लैपटॉप और मोबाइल फोन, दोनों के लिए कई फ्री VPN ऐप्स उपलब्ध हैं। हालांकि, डाउनलोड केवल वैध सोर्स से करें और साथ ही रेटिंग्स और रिव्यूज देखना न भूलें।
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6. बैंकिंग और पेमेंट ऐप्स में रहें सतर्क

साइबर अटैक्स का एक बड़ा टारगेट फाइनेंशियल सिस्टम होता है। इसलिए UPI, इंटरनेट बैंकिंग या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते समय पूरी सावधानी बरतें। किसी भी फर्जी कॉल, SMS या QR कोड पर भरोसा न करें। हमेशा ऑफिशियल ऐप्स और वेबसाइट्स के जरिए ही ट्रांजैक्शन करें और ट्रांजैक्शन नोटिफिकेशन को एक्टिव रखें ताकि कोई भी गड़बड़ी तुरंत पकड़ में आ सके।
 

7. फालतू की परमिशन न दें

कई बार हम बिना सोचे-समझे ऐप्स को माइक्रोफोन, कैमरा और लोकेशन जैसी परमिशन दे देते हैं। लेकिन ये बहुत बड़ा सिक्योरिटी रिस्क बन सकता है। हर ऐप इंस्टॉल करते समय उसकी जरूरत और परमिशन को ध्यान से जांचें। अगर किसी ऐप को इनकी जरूरत नहीं है फिर भी वो मांग रहा है, तो सतर्क हो जाएं। सेटिंग्स में जाकर परमिशन को समय-समय पर रिव्यू करना एक अच्छी आदत है।
 

8. अफवाह फैलाने से बचें

साइबर वॉर सिर्फ तकनीकी नहीं बल्कि साइकोलॉजिकल भी होती है। झूठी खबरें और गलत सूचनाएं सोशल मीडिया पर फैलाकर डर और भ्रम फैलाना भी एक तरह का अटैक है। इसलिए किसी भी खबर को बिना जांचे आगे न बढ़ाएं। हमेशा आधिकारिक और भरोसेमंद सोर्स से जानकारी लें और दूसरों को भी जागरूक करें।
 

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