इस सप्ताह की शुरुआत में स्टारलिंक की वाइस प्रेसिडेंट, Lauren Dreyer ने बताया था कि भारत में उनकी कंपनी पिछले पांच वर्षों से सर्विस शुरू करने की तैयारी कर रही है। स्टारलिंक ने अपने कामकाज के लिए देश की सुरक्षा से जुड़ी जरूरतों का ध्यान रखा है
सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट सर्विस उपलब्ध कराने वाली Starlink को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। ट्रिलिनेयर Elon Musk की इस कंपनी को भारत में अपनी सर्विस शुरू करने के लिए केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने का इंतजार है। मस्क ने दावा किया है कि भारत में "कुछ प्रभावशाली लोग" इस बिजनेस में अपनी दबदबे वाली स्थिति को बरकरार रखने के लिए स्टारलिंक की सर्विस को रोक रहे हैं। हालांकि, केंद्र सरकार ने इस दावे को गलत बताया है।
मिनिस्ट्री ऑफ कम्युनिकेशंस ने कहा है देश में स्टारलिंक की सैटलाइट इंटरनेट सर्विस सहित सभी टेलीकम्युनिकेशन सर्विसेज के लिए एक निष्पक्ष, गैर-भेदभाव वाली पॉलिसी है। लाइसेंस के नियम और शर्तों के तहत, प्रत्येक लाइसेंसी को सिक्योरिटी से जुड़ी शर्तों के कम्प्लायंस को दिखाने की जरूरत होती है। इस प्रोसेस के पूरा होने पर स्पेक्ट्रम के आवंटन के अगले कदम की ओर बढ़ा जा सकता है। मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा था, "कुछ प्रभावशाली लोग भारत में अपनी दबदबे वाली स्थिति को बरकरार रखने के लिए हमें ब्लॉक कर रहे हैं।"
इस सप्ताह की शुरुआत में स्टारलिंक की वाइस प्रेसिडेंट, Lauren Dreyer ने बताया था कि भारत में उनकी कंपनी पिछले पांच वर्षों से सर्विस शुरू करने की तैयारी कर रही है। स्टारलिंक ने अपने कामकाज को स्थापित करने के लिए देश की सुरक्षा से जुड़ी जरूरतों का ध्यान रखा है। Dreyer ने कहा था कि देश में कस्टमर्स तक सर्विस पहुंचाने के लिए स्टारलिंक ने Reliance Jio और Bharti Airtel के साथ एग्रीमेंट किए हैं। उन्होंने बताया था कि भारत में कंपनी ने इनवेस्टमेंट किया है। देश में स्टारलिंक ने 20 गेटवे सााइट्स और सैंकडों एंटीना लगाए हैं।
मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स के तहत आने वाली सिक्योरिटी एजेंसियों कुछ महीने पहले देश में स्टारलिंक की सर्विस शुरू करने के लिए अंतिम मंजूरी को रोक दिया था। इसके पीछे ईरान में स्टारलिंक को लाइसेंस नहीं मिलने के बावजूद इसके सैटेलाइट टर्मिनल्स के इस्तेमाल से जुड़ी रिपोर्ट्स प्रमुख कारण था। इससे भू-राजनीतिक संकट की स्थिति में इस अमेरिकी कंपनी को कंट्रोल करने की अथॉरिटीज की क्षमता पर सवाल उठे थे। स्टारलिंक को देश में एक वर्ष पहले ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट (GMPCS) लाइसेंस दिया गया था। हालांकि, इस लाइसेंस से कंपनी को सिर्फ अपने कामकाज के लिए तैयारी करने और एग्रीमेंट्स साइन करने की अनुमति मिली थी। स्टारलिंक को सर्विस लॉन्च करने से पहले अतिरिक्त रेगुलेटरी और सिक्योरिटी क्लीयरेंसेज लेने की जरूरत है।
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