"आपके डिवाइस में वायरस है!" ऐसे स्कैम Google Chrome पर अब नहीं करेंगे परेशान, कंपनी की बड़ी तैयारी

Google का कहना है कि वह अपने Gemini AI मॉडल के एक वर्जन को Scam का पता लगाने के लिए इस्तेमाल कर रही है।

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Written by हेमन्त कुमार, अपडेटेड: 11 मई 2025 11:23 IST
ख़ास बातें
  • Google Chrome पर होने वाले स्कैम्स पर लगेगी लगाम
  • स्कैम पहचानने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल
  • Gemini AI मॉडल के एक वर्जन का इस्तेमाल कर रही गूगल

Google की Chrome पर होने वाले स्कैम्स पर पूरी तरह से लगाम लगाने की तैयारी

Photo Credit: iStock

Google Chrome पर होने वाले स्कैम्स पर पूरी तरह से लगाम लगाने के लिए कमर कस चुकी है। कंपनी अपने Chrome ब्राउजर में सभी तरह के स्कैम पहचानने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को इंटीग्रेट कर रही है। हम सब रोजमर्रा की जिंदगी में इंटरनेट का इस्तेमाल कहीं न कहीं जरूर करते हैं। आपमें से भी लगभग हर किसी ने इंटरनेट इस्तेमाल करते समय ब्राउजर में कई ऐसे पॉप-अप विंडो जरूर देखें होंगे जिनमें लिखा होता है "आपके डिवाइस में वायरस है!" ऐसे विंडो पॉपअप आपको टेक सपोर्ट के लिए सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने की सलाह या निर्देश देते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि इंटरनेट पर इस तरह के ऑनलाइन स्कैम बहुत आम हैं। लेकिन अब ऐसे स्कैम्स पर Google लगाम लगाने के लिए कमर कस चुकी है। 

Google ने स्कैम के खिलाफ लड़ाई को और तेज कर दिया है। Google का कहना है कि वह अपने Gemini AI मॉडल के एक वर्जन को इस्तेमाल कर रही है जो डिवाइसेज पर टेक सपोर्ट स्कैम की पहचान करेगा और यूजर्स को इसके बारे में अलर्ट करेगा। कंपनी का कहना है कि यह उन कई तरीकों में से एक है जहां कंपनी AI एडवांसमेंट को साथ लेकर इसका इस्तेमाल Chrome पर यूजर्स की सुरक्षा के लिए कर रही है। इसमें गूगल का Search और Android ऑपरेटिंग सिस्टम भी शामिल है। गूगल ने एक ब्लॉग पोस्ट में इसकी जानकारी दी है। 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आने के बाद इसका इस्तेमाल स्कैमर्स भी धड़ल्ले से कर रहे हैं। साइबर हैकर्स, और अटैकर्स AI की मदद से ऐसा जाल बिछाते हैं जिससे यूजर आसानी से स्कैम का शिकार हो सकता है। इंटरनेट पर फेक कंटेंट की बाढ़ सी आ गई है। साइबर हैकर्स इसी तरह के स्कैम की मदद से यूजर्स का पैसा चुरा लेते हैं या निजी जानकारी चुरा लेते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल दुनियाभर में 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का स्कैम यूजर्स के साथ हो चुका है। इसलिए Google समेत अन्य ऑर्गनाइजेशंस भी अब AI को स्कैम्स से इस लड़ाई में उतार रही हैं। 

Google Search के इंजीनियरिंग के सीनियर डायरेक्टर फिरोज पारख ने कहा कि स्कैमर्स से लड़ना हमेशा से एक इवॉल्यूशन गेम रहा है, जहां बुरे लोग सीखते हैं और विकसित होते हैं क्योंकि टेक कंपनियां नई सुरक्षा लागू करती रहती हैं। गूगल ने कहा कि डेस्कटॉप पर Chrome के "enhanced protection" सुरक्षित ब्राउज़िंग मोड में सेफ्टी कई गुना बढ़ गई है। इस मोड में इसका ऑन-डिवाइस AI मॉडल अब किसी वेबपेज को रियल टाइम में प्रभावी ढंग से स्कैन कर सकता है जब कोई यूजर संभावित खतरों को देखने के लिए उस पर क्लिक करता है। 
 
 

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