वॉयस असिस्टेंट बना जासूस? नहीं मानी गलती, लेकिन फिर भी 623 करोड़ का जुर्माना भरेगा Google

Google ने अपने वॉयस असिस्टेंट पर लगे जासूसी के आरोपों को निपटाने के लिए 68 मिलियन डॉलर का सेटलमेंट किया है।

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Written by नितेश पपनोई, अपडेटेड: 28 जनवरी 2026 13:43 IST
ख़ास बातें
  • Google Assistant जासूसी आरोपों पर 68 मिलियन डॉलर का सेटलमेंट
  • कंपनी ने सेटलमेंट में किसी भी गलती को स्वीकार नहीं किया
  • केस बिना वेक वर्ड रिकॉर्डिंग यानी false accepts से जुड़ा था

Google ने सेटलमेंट में किसी भी गलती को स्वीकार नहीं किया

Photo Credit: Unsplash/ Firmbee

Google ने अपने वॉयस असिस्टेंट को लेकर लगे जासूसी के आरोपों से जुड़े एक मामले को निपटाने के लिए कथित तौर पर 68 मिलियन डॉलर (करीब 623.50 करोड़ रुपये) चुकाने पर सहमति जताई है। एक एजेंसी रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला उस क्लास-एक्शन मुकदमे से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि Google Assistant यूजर्स की अनुमति के बिना उनकी बातचीत रिकॉर्ड करता था और उस डेटा का इस्तेमाल विज्ञापनों सहित अन्य उद्देश्यों के लिए किया गया।

हालांकि, इस सेटलमेंट में Google ने किसी भी तरह की गलती स्वीकार नहीं की है। रॉयटर्स की रिपोर्ट बताती है कि मुकदमे में दावा किया गया था कि कंपनी ने जानबूझकर और गैरकानूनी तरीके से लोगों की निजी बातचीत को इंटरसेप्ट और रिकॉर्ड किया, और बाद में उस जानकारी को थर्ड पार्टी के साथ शेयर किया गया। आरोपों के मुताबिक, इन रिकॉर्डिंग्स से मिले डेटा का इस्तेमाल टार्गेटेड एडवरटाइजिंग के लिए भी किया गया।

यह केस खास तौर पर “false accepts” से जुड़ा था। इसमें कहा गया कि Google Assistant कई बार बिना किसी वेक वर्ड के एक्टिव हो जाता था और यूजर्स की बातचीत रिकॉर्ड करने लगता था, जबकि उन्होंने असिस्टेंट को जानबूझकर चालू नहीं किया होता था।

दरअसल, अमेरिका में लंबे समय से यह आशंका रही है कि स्मार्ट डिवाइसेज यूजर्स की बातचीत पर नजर रखते हैं। इसी तरह के आरोपों के चलते पहले भी बड़ी टेक कंपनियों को कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। 2021 में Apple ने भी अपने वॉयस असिस्टेंट Siri को लेकर लगे आरोपों को निपटाने के लिए 95 मिलियन डॉलर (करीब 871 करोड़ रुपये) का सेटलमेंट किया था।

Google के लिए यह पहला प्राइवेसी से जुड़ा मामला नहीं है। बीते साल कंपनी ने टेक्सस राज्य के साथ दो अलग-अलग मुकदमों को सेटल करने के लिए करीब 1.4 बिलियन डॉलर (लगभग 12,836 करोड़ रुपये) देने पर भी सहमति जताई थी, जिनमें डेटा प्राइवेसी कानूनों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए थे।

 

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