फेक ट्रैफिक चालान स्कैम के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पुणे और दिल्ली में लोगों से लाखों रुपये की ठगी हुई, जहां नकली लिंक के जरिए बैंक डिटेल्स चोरी की गईं।
फेक ट्रैफिक चालान मैसेज के जरिए लोगों से लाखों रुपये की ठगी
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देश में इन दिनों फेक ट्रैफिक चालान के नाम पर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। साइबर ठग लोगों को SMS, WhatsApp या ईमेल के जरिए नकली चालान भेजकर डर और जल्दबाजी का फायदा उठा रहे हैं। हाल के दो मामलों में लोगों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। इन मैसेज में खुद को RTO या सरकारी नोटिस जैसा दिखाया जाता है, जिससे लोग इसे असली समझकर लिंक पर क्लिक कर देते हैं। पुलिस के मुताबिक यह स्कैम अब पहले से ज्यादा संगठित और खतरनाक हो गया है।
लेटेस्ट घटना पुणे से रिपोर्ट की गई है, जहां एक 57 वर्षीय दुकानदार से करीब 2.76 लाख रुपये की ठगी हुई। यह घटना दिसंबर 2025 की बताई गई है। पुलिस के अनुसार (via TOI), पीड़ित को ‘RTO Challan' नाम से एक मैसेज मिला, जिसमें एक लिंक दिया गया था। असली चालान समझकर उसने लिंक खोला और एक फॉर्म में अपनी बैंकिंग जानकारी भर दी।
विष्रामबाग पुलिस के मुताबिक, लिंक पर क्लिक करने के बाद उसके फोन में एक रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर इंस्टॉल हो गया, जिससे ठगों को डिवाइस का कंट्रोल मिल गया। इसके बाद आरोपियों ने उसके बैंक अकाउंट से पैसे निकाल लिए। पुलिस का यह भी कहना है कि ठगों ने फोन का कंट्रोल मिलने के बाद ट्रांजैक्शन अलर्ट मैसेज भी डिलीट कर दिए, जिससे पीड़ित को तुरंत पता नहीं चल सका।
हाल ही में इसी तरह का एक और मामला दिल्ली के लक्ष्मी नगर से सामने आया था, जहां 65 वर्षीय व्यक्ति को नकली चालान के नाम पर ठगा गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके पास 500 रुपये के चालान का मैसेज आया था, जिसमें पेमेंट लिंक दिया गया था। शख्स ने इसे असली समझकर अपने क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने की कोशिश की।
हालांकि शुरुआती पेमेंट सामान्य लगा, लेकिन कुछ ही समय बाद उनके बैंक अकाउंट से करीब 2.49 लाख रुपये कट गए। पुलिस के अनुसार यह ट्रांजैक्शन इंटरनेशनल रूट के जरिए किया गया था। इस मामले में धोखाधड़ी और पहचान के दुरुपयोग का केस दर्ज किया गया है।
साइबर ठग इस स्कैम को इस तरह डिजाइन करते हैं कि यह बिल्कुल असली सरकारी नोटिस जैसा लगे।
आमतौर पर आपको एक मैसेज मिलता है जिसमें कहा जाता है कि आपका ट्रैफिक चालान बकाया है। इसमें सरकारी भाषा और लोगो का इस्तेमाल किया जाता है और तुरंत भुगतान करने के लिए लिंक या QR कोड दिया जाता है।
यह लिंक अक्सर किसी नकली वेबसाइट पर ले जाता है, जो Parivahan पोर्टल जैसी दिखती है। यहां यूजर से कार्ड डिटेल, OTP या बैंकिंग जानकारी मांगी जाती है और जैसे ही यह जानकारी दी जाती है, खाते से पैसे निकाल लिए जाते हैं।
पुलिस के मुताबिक कुछ संकेत ऐसे होते हैं जो फेक चालान स्कैम की पहचान करने में मदद कर सकते हैं।
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