Online Banking Tips: डिजिटल बैंकिंग के लिए इन 8 आदतों को अपना लिया तो खत्म हो जाएगा हैकर्स का डर!

ऑनलाइन बैंकिंग का इस्तेमाल आज हर कोई करता है, लेकिन हैकर्स भी इसी का फायदा उठाते हैं। अगर आप रोजमर्रा की डिजिटल आदतों में थोड़ा बदलाव करें, तो साइबर क्राइम से काफी हद तक सुरक्षित रह सकते हैं।

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अपडेटेड: 20 सितंबर 2025 07:08 IST
ख़ास बातें
  • 2FA को बनाएं अपनी सबसे पहली आदत
  • फिशिंग मैसेज और ईमेल से सतर्क रहें
  • सुरक्षित ब्राउजिंग और VPN का इस्तेमाल करें

आज के समय में बैंकिंग ऐप्स के लिए Two-Factor Authentication (2FA) बेहद जरूरी है

Photo Credit: Unsplash/ Dan Nelson

समझदार बैंक यूजर वही जो पैसों की तरह अपनी डिजिटल आदतों का भी ध्यान रखे। आजकल हैकर्स सिर्फ टेक्नीक्स नहीं अपनाते, वे हमारी लापरवाही, आदतों और छोटी-छोटी चेकलिस्ट्स का फायदा उठाते हैं। बैंकिंग तब सुरक्षित रहेगी जब आप तकनीक को अपने दोस्त की तरह इस्तेमाल करें और कुछ रोजमर्रा की आदतों को रूटीन बना लें। नीचे 8 ऐसी प्रैक्टिकल आदतें दी हैं जिन्हें अपनाने से आप बैंकिंग फ्रॉड और हैकिंग रिस्क को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

1. पासवर्ड सिस्टेम बदलें
हर अकाउंट के लिए अलग और मजबूत पासवर्ड रखिए। पासफ्रेज (लंबा वाक्य) बेहतर होता है। पासवर्ड मैनेजर (जैसे Bitwarden, 1Password आदि) का इस्तेमाल अच्छा ऑप्शन होता है, क्योंकि यह न केवल पासवर्ड को सेव रखते हैं, बल्कि आपको नए लॉन्ग और हाई-सिक्योरिटी पासवर्ड बनाकर भी देते हैं।

2. Two-Factor Authentication (2FA) बेहद जरूरी
आज के समय में यह सिक्योरिटी फीचर बेहद अहम बन गया है। आज के समय में हर ऐप या सर्विस में यह ऑप्शन मिलता है, जो एक तरह से सिक्योरिटी की एक्स्ट्रा लेयर होती है। जहां भी संभव हो UPI/NetBanking/बैंक ऐप पर 2FA को इनेबल रखें। इसमें कई तरीके होते हैं, जैसे कि रजिस्टर्ड नंबर पर OTP मिलना या किसी थर्ड-पार्टी ऑथेंटिकेटर ऐप (Google Authenticator या Microsoft Authenticator या अन्य) पर मौजूद Key को सबमिट करना।

3. सॉफ्टवेयर अपडेट और बैकअप का रूटीन
स्मार्टफोन, बैंकिंग ऐप और OS को हमेशा अपडेट रखें। अक्सर डिवाइस के लिए OEM या बैंक ऐप के लिए बैंक द्वारा सिक्योरिटी पैच जारी किए जाते हैं, जो उन लूपहोल्स को खत्म करते हैं, जिनका फायदा हैकर्स द्वारा उठाया जाता है। ऐसा अक्सर देखा गया है कि ऐसे लूपहोल्स की जानकारी बाहर आने के तुरंत बाद कंपनियों या बैंक द्वारा पैच अपडेट्स जारी किए जाते हैं। इसलिए हमेशा अपने डिवाइस और बैंक ऐप्स को अप-टू-डेट रखें। साथ में महत्वपूर्ण डॉक्युमेंट्स का एन्क्रिप्टेड बैकअप रखें ताकि कोई लॉस हो तो रिकवरी आसान रहे।

4. फिशिंग मैसेज/ईमेल से बचकर रहें
बैंक जैसी संस्थाओं से आए हुए SMS या ईमेल में लिंक पर क्लिक करने से पहले हमेशा URL और भेजने वाले का असली डोमेन चेक करें। कोई अर्जेंट थ्रेट या “क्लिक करो वरना अकाउंट ब्लॉक” जैसी भाषा हो तो सतर्क हो जाइए, क्योंकि आधिकारिक ऐप/वेबसाइट ऐसे मैसेज एक-एक यूजर को नहीं भेजते हैं।

5. वेब पर बैंकिंग सर्विस यूज करते हुए URL को जांचे 
बैंकिंग या कोई भी सुरक्षित वेबसाइट हमेशा HTTPS वाले डोमेन चलाते हैं। ऐसे में केवल उन URL को एक्सेस करें जो Https से शुरू होते हैं। 

6. पब्लिक वाई-फाई पर बैंकिंग नहीं
पब्लिक वाई-फाई पर बैंकिंग ऐप या वेब सर्विस लॉग-इन करने से बचें। ये सिक्योर नेटवर्क नहीं होते हैं। इनमें कई तरह के सिक्योरिटी लूपहोल्स होते हैं, जिससे हैकर्स इन्हें हैक कर सकते हैं और इसके जरिए आपके डिवाइस तक पहुंच बना सकते हैं।

7. VPN यूज करना अच्छा ऑप्शन
चाहे प्राइवेट हो या पब्लिक Wi-Fi नेटवर्क हो या मोबाइल नेटवर्क, वेब पर बैंकिंग करते समय VPN को इनेबव करना एक अच्छा ऑप्शन है। कई ऐप्स VPN पर काम नहीं करते हैं, लेकिन वेब पर सर्विस को एक्सेस किया जा सकता है। VPN मैन-इन-द-मिडल का काम करता है और नेटवर्क को रीराउट करता है, जिससे अटैक्स का जोखिम कम हो जाता है।

8. परमिशन और ऐप-सोर्स कड़े रखें
मोबाइल पर सिर्फ आधिकारिक स्टोर से ही बैंकिंग ऐप इंस्टॉल करें। ऐप्स को अनावश्यक परमिशन मत दें, जैसे कैमरा या माइक्रोफोन। कॉन्टैक्ट और SMS का एक्सेस भी सिर्फ तभी दें जब सॉफ्टवेयर उसे मांगने का सही कारण बताता हो। किसी भी बैंकिंग ऐप को साइडलोड न करें। यहां तक कि किसी अन्य तरह के ऐप के लिए भी अनजान APK इंस्टॉल न करें, क्योंकि उसके जरिए मैलवेयर या वायरस आपके डिवाइस में घुस सकता है और बैंकिंग ऐप्स तक पहुंच बना सकता है।

इन आदतों को रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल कर लें। भले ही यह पहली नजर में छोटे व मामूली बदलाव लगते हैं पर इमपैक्ट बड़े हैं।

क्या टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) हर बैंकिंग ऐप में उपलब्ध है?

हां, ज्यादातर बैंकिंग ऐप्स और नेटबैंकिंग पोर्टल अब 2FA सपोर्ट करते हैं। इसे एक्टिवेट करना आपकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

फिशिंग ईमेल को पहचानने का आसान तरीका क्या है?

हमेशा भेजने वाले की ईमेल आईडी चेक करें और अटैचमेंट या लिंक पर बिना जांचे क्लिक न करें।

क्या VPN सिर्फ इंटरनेशनल ब्राउज़िंग के लिए होता है?

नहीं, VPN आपकी ऑनलाइन एक्टिविटी को एन्क्रिप्ट करता है और पब्लिक Wi-Fi पर बैंकिंग को और सुरक्षित बनाता है।

क्या HTTPS न होने पर वेबसाइट को तुरंत छोड़ देना चाहिए?

बिलकुल, क्योंकि बिना HTTPS वाली साइट पर डाले गए डेटा को हैकर्स आसानी से इंटरसेप्ट कर सकते हैं।

क्या बैंक कभी लिंक या OTP मांगते हैं?

नहीं, कोई भी बैंक ईमेल, मैसेज या कॉल के जरिए कभी OTP या पासवर्ड नहीं मांगता।

क्या सिर्फ मजबूत पासवर्ड काफी है?

मजबूत पासवर्ड जरूरी है, लेकिन इसे 2FA, सिक्योर नेटवर्क और फिशिंग अलर्टनेस के साथ मिलाकर ही पूरी सुरक्षा मिलती है।

 

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