GJ 3378b नाम का यह ग्रह, कैमेलोपार्डालिस तारामंडल में मौजूद एक धुंधले लाल बौने तारे का चक्कर लगाता है।
अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने सुदूर ब्रह्मांड में एक ऐसे ग्रह का पता लगाया है जहां पर जीवन की संभावनाओं का पता लगाया जा रहा है।
Photo Credit: Space.com
पृथ्वी से करोड़ों मील दूर एक नई पृथ्वी की खोज हुई है! जी हां, वैज्ञानिकों ने पृथ्वी जैसा ही एक अन्य खगोलीय पिंड खोज निकाला है जहां पर जीवन की संभावना हो सकती है। यह एक चट्टानी ग्रह है। ऐसे ग्रहों को एग्सोप्लेनेट कहा जाता है। यह नया ग्रह पृथ्वी से 25 प्रकाशवर्ष दूर स्थित बताया जाता है। कहा जा रहा है कि इस ग्रह पर इसके तारे का रेडिएशन लगातार पड़ रहा है। आइए जानते हैं और क्या पता चलता है इस नए ग्रह के बारे में।
अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने सुदुर ब्रह्मांड में एक ऐसे ग्रह का पता लगाया है जहां पर जीवन की संभावनाओं का पता लगाया जा रहा है। Space.com के अनुसार, इसका नाम GJ 3378b है। यह हमारी पृथ्वी से 25 प्रकाश वर्ष दूर है। यह दूरी बहुत अधिक नहीं है। क्योंकि हमारी आकाशगंगा ही 1 लाख प्रकाशवर्ष में फैली हुई है। इसलिए इसे एक नजदीकी ग्रह कहा जा रहा है। GJ 3378b नाम का यह ग्रह, कैमेलोपार्डालिस तारामंडल में मौजूद एक धुंधले लाल बौने तारे का चक्कर लगाता है। इसकी खोज 2024 में फ्रांसीसी खगोलविदों ने मौना केआ में कनाडा-फ्रांस-हवाई टेलीस्कोप के माध्यम से की थी। लेकिन अमेरिकी खगोलविदों ने शुरुआती नतीजों में सुधार किया है। उन्होंने पाया है कि यह ग्रह शायद पृथ्वी जैसा ही है।
इस एक्सोप्लेनेट का द्रव्यमान (mass) पृथ्वी से 2.3 गुना है और यह 21 दिन में कक्षा का एक चक्कर पूरा करता है। यह अपने तारे के रहने योग्य क्षेत्र यानी हैबिटेबल जोन में स्थित है। इस बात का महत्व इसलिए बढ़ जाता है कि ब्रह्मांड में पृथ्वी के अलावा कहीं और जीवन के संभावित संकेतों की खोज में इसकी भूमिका बढ़ जाती है। क्योंकि यह हमारी पृथ्वी के काफी पास स्थित है।
GJ 3378b ग्रह अपने तारे के सामने से गुजरता हुआ नहीं दिखता, जिससे हमारी नजर से तारे की रोशनी रुकती हो। इसका पता तब चला जब इसकी ग्रेविटी ने अपने मूल तारे को अपनी ओर खींचा। खिंचाव की वजह से तारा उस द्रव्यमान केंद्र के चारों ओर डगमगाने लगता है जो वह ग्रह के साथ साझा करता है। इस डगमगाहट का पता तारे की रोशनी में होने वाले 'डॉपलर शिफ्ट' से चलता है, जिसे तारे से निकलने वाली रोशनी की वेवलेंथ यानी स्पेक्ट्रा से मापा जा सकता है।
जब 2024 में इसकी खोज हुई थी, तो इसका द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान का 5.26 गुना मापा गया था, जिससे यह 'मिनी-नेपच्यून' की श्रेणी में आ गया—यानी एक बड़ा और ज़्यादातर गैस वाला ग्रह। हालाँकि, दो अलग-अलग टेलीस्कोप का इस्तेमाल करके इस ग्रह को दोबारा देखने पर, रॉबर्टसन की टीम यह दिखा पाई कि ग्रह का असली द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान का 2.3 गुना है। इसका मतलब है कि यह असल में एक चट्टानी 'सुपर-अर्थ' के ज़्यादा करीब है। भविष्य में एलियन प्लेनेट पर जीवन की खोज में इस ग्रह की अहम भूमिका हो सकती है।
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हेमन्त कुमार Gadgets 360 में सीनियर ...और भी