कैसे डेवलप होती हैं बौनी आकाशगंगाएं, भारतीय वैज्ञानिकों ने लगाया पता

बौनी आकाशगंगाओं का आकार अन‍ियमित होता है। वो तारों का निर्माण करती हैं। उनका द्रव्यमान हमारी आकाशगंगा से 50 गुना कम हो सकता है।

विज्ञापन
प्रेम त्रिपाठी, अपडेटेड: 29 जुलाई 2022 12:49 IST
ख़ास बातें
  • रिसर्चर्स की टीम ने 11 नीली बौनी आकाशगंगाओं को देखा
  • ये पृथ्‍वी से 1.3 से 2.8 अरब प्रकाश वर्ष दूर हैं
  • पता चला कि बौनी आकाशगंगाएं बाहर से पदार्थ यानी मैटर को जमा कर रही हैं

वैज्ञानिकों ने एस्ट्रोसैट के अल्ट्रावाइलेट इमेजिंग टेलीस्कोप द्वारा कैप्चर किए गए 17 घंटे के ऑब्‍जर्वेशन डेटा की जांच की।

छोटी या बौनी आकाशगंगाएं हमारे ब्रह्मांड के निर्माण में अहम भूमिका निभाती हैं। भारतीय खगोलविदों के एक ग्रुप ने इन आकाशगंगाओं की ग्रोथ का एक बड़ा खाका खींचने के लिए महत्वपूर्ण कड़ी प्रदान की है। भारत की पहली स्‍पेस ऑब्‍जर्वेट्री एस्ट्रोसैट (Astrosat) का उपयोग करते हुए IUCAA पुणे के खगोल भौतिकीविदों और अमेरिका व फ्रांस में उनके सहयोगियों ने बताया है कि कैसे बौनी आकाशगंगा के बाहरी इलाके में तारों का निर्माण करने वालीं चीजें आकाशगंगा के सेंट्रल रीजन की ओर पलायन करती हैं। वह अपने द्रव्‍यमान व चमक से उसके विकास में योगदान देती हैं। 

डेक्‍कन हेराल्‍ड की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो दशकों में हाई-क्‍वॉलिटी टेलीस्‍कोप की मदद से वैज्ञानिकों को हमारी आकाशगंगा यानी मिल्‍की-वे समेत अन्‍य बड़ी आकाशगंगाओं को बारीकी से समझने में मदद मिली है। वैज्ञानिकों ने जाना है कि विशाल आकाशगंगाएं कई बौनी आकाशगंगाओं से घिरी हुई हैं। 

बौनी आकाशगंगाओं का आकार अन‍ियमित होता है। वो तारों का निर्माण करती हैं। उनका द्रव्यमान हमारी आकाशगंगा से 50 गुना कम हो सकता है। बौनी और बड़ी आकाशगंगाएं अपने तारों को कैसे इकट्ठा करती और खुद डेवलप होती हैं, यह अभी भी एक पहेली है। लगता है कि वैज्ञानिकों ने बौनी आकाशगंगाओं के मामले में इस पहेली को सुलझा लिया है।  

IUCAA के साइंटिस्‍ट कनक साहा उनके पीएचडी स्‍टूडेंट अंशुमान बोर्गोहेन और पेरिस व अन्‍य जगहों में उनके सहयोगियों ने एस्ट्रोसैट के अल्ट्रावाइलेट इमेजिंग टेलीस्कोप द्वारा कैप्चर किए गए 17 घंटे के ऑब्‍जर्वेशन डेटा की जांच करने का फैसला किया। रिसर्चर्स की टीम ने 11 नीली बौनी आकाशगंगाओं को देखा, जो पृथ्‍वी से 1.3 से 2.8 अरब प्रकाश वर्ष दूर हैं। वैज्ञानिकों के सामने मुख्य चुनौती तारे बनाने वाले उन गुच्छों का पता लगाना था, जो बहुत दूर थे, लेकिन उनके अंदर एक लाख सौर द्रव्यमान के जितना मटीरियल है। वैज्ञानिकों ने समझा है कि बड़े तारे बनाने वाले वो ‘गुच्‍छे' एक परिधि पर बनते हैं और फिर एक खास समय के भीतर आकाशगंगा में शामिल होते हैं, जिससे आकाशगंगा डेवलप होती है। 

कनक साहा ने डेक्‍कन हेराल्‍ड से बातचीत में कहा कि हमें इस बात के सबूत मिले हैं कि ये बौनी आकाशगंगाएं बाहर से पदार्थ यानी मैटर को जमा कर रही हैं। उन्‍होंने सुदूर स्थित इन बौनी आकाशगंगाओं के ‘लाइव' निर्माण को देखा है। ये फाइंडिंग्‍स पिछले हफ्ते नेचर मैगजीन में पब्लिश हुई हैं।
 
 

लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स 360 एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें।

Advertisement
Popular Brands
#ट्रेंडिंग टेक न्यूज़
  1. भारत में सेमीकंडक्टर्स की 25 प्रतिशत डिमांड पूरी करेगी HCL 
  2. iQOO 15R 5G की लीक हुई प्राइसिंग, अगले सप्ताह होगा भारत में लॉन्च
  3. 7000mAh बैटरी के साथ 2026 के पावरफुल स्मार्टफोन! Realme 16 Pro, IQOO Neo 10, Motorola G67 Power समेत जानें लिस
  4. Airtel सबसे सस्ते में लाई डेली 4GB, अनलिमिटिड कॉलिंग, FREE JioHotstar, 20 OTT ऐप, Apple Music वाला धांसू प्लान
#ताज़ा ख़बरें
  1. Airtel सबसे सस्ते में लाई डेली 4GB, अनलिमिटिड कॉलिंग, FREE JioHotstar, 20 OTT ऐप, Apple Music वाला धांसू प्लान!
  2. IND vs SA T20 Live Streaming: सुपर-8 में भारत बनाम साउथ अफ्रीका T20 मैच आज, ऐसे देखें फ्री!
  3. 7000mAh बैटरी के साथ 2026 के पावरफुल स्मार्टफोन! Realme 16 Pro, IQOO Neo 10, Motorola G67 Power समेत जानें लिस्ट
  4. WhatsApp का सबसे धांसू अपडेट! 'बर्थडे विश' के लिए नहीं पड़ेगा रातभर जागना, आ रहा शेड्यूल मैसेज फीचर
  5. घर को स्मार्ट बनाने 7 इंच बड़ी राउंड शेप टच स्क्रीन Waveshare ने की लॉन्च, जानें कीमत
  6. 27 हजार सस्ता मिल रहा Google Pixel फ्लैगशिप फोन, 64MP का धांसू कैमरा!
  7. भारत में सेमीकंडक्टर्स की 25 प्रतिशत डिमांड पूरी करेगी HCL 
  8. iQOO 15R 5G की लीक हुई प्राइसिंग, अगले सप्ताह होगा भारत में लॉन्च
  9. Samsung Galaxy S26 होगा बेस्ट कैमरा फोन! 24MP सेंसर के साथ नया फीचर लीक
  10. सिकुड़ रही है चंद्रमा की धरती! NASA के Artemis मिशन में पड़ेगी खटाई? वैज्ञानिकों ने क्या कहा, जानें
Download Our Apps
Available in Hindi
© Copyright Red Pixels Ventures Limited 2026. All rights reserved.