चीन ने अपने स्पेस स्टेशन में दी पाकिस्तानी को जगह! पहली बार भेजेगा विदेशी मेहमान

चीन ने तियांगोंग स्पेस स्टेशन पर पहले विदेशी मेहमान के तौर पर पाकिस्तान से एक अंतरिक्ष यात्री को भेजने की घोषणा की है।

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Written by हेमन्त कुमार, अपडेटेड: 2 मार्च 2025 10:04 IST
ख़ास बातें
  • चीन और पाकिस्तान ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • चीन पाकिस्तानी अंतरिक्ष यात्रियों चुनेगा और उनको ट्रेनिंग भी देगा।
  • पाकिस्तान को चीन का करीबी सहयोगी माना जाता है।

चीन अपने स्पेस स्टेशन पर पाकिस्तान के अंतरिक्ष यात्री को मेहमान के रूप में भेजेगा।

चीन अपने स्पेस स्टेशन पर पाकिस्तान के अंतरिक्ष यात्री को मेहमान के रूप में भेजेगा। चीन ने तियांगोंग स्पेस स्टेशन पर पहले विदेशी मेहमान के तौर पर पाकिस्तान से एक अंतरिक्ष यात्री को भेजने की घोषणा की है। चीन की मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम संचालित करने वाली एजेंसी (China Manned Space Agency (CMSA) के मुताबिक, बीते शुक्रवार को चीन और पाकिस्तान ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौते में कहा गया है कि चीन पाकिस्तानी अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस मिशन के लिए चुनेगा और उनको ट्रेनिंग भी देगा। 

पाकिस्तान को चीन का करीबी सहयोगी माना जाता है और दोनों देश अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी साझेदारी को मजबूत कर रहे हैं। चीन के सरकारी अखबार China Daily की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी अंतरिक्ष यात्री को स्पेस में भेजने के समझौते पर China Manned Space Agency (CMSA) और पाकिस्तान की एजेंसी Space and Upper Atmosphere Research Commission (SUPARCO) ने इस्लामाबाद में एक समारोह के दौरान हस्ताक्षर किए। समारोह में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी शामिल हुए। 

चीन अपने करीबी सहयोगी पाकिस्तान की मदद के लिए पिछले कुछ वर्षों से उसके लिए सैटेलाइट भी लॉन्च कर रहा है। यह चीन के पाकिस्तान को अंतरिक्ष क्षेत्र में दिए जा रहे सहयोग का भाग है। चीन का अंतरिक्ष स्टेशन तियांगोंग मौजूदा वक्त में पृथ्वी से 400 किलोमीटर ऊपर चक्कर लगा रहा है। यह पिछले चार वर्षों से पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगा रहा है। इसे रूस के अंतरिक्ष स्टेशन Mir का प्रतिद्वंदी माना जाता है। 

चीन ने क्यों बनाया अपना अलग स्पेस स्टेशन?
चीन को अपना अलग स्पेस स्टेशन बनाने की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से चीन को बाहर कर दिया गया था। इसलिए चीन ने तियांगोंग का निर्माण किया। चीन को बाहर का रास्ता इसलिए दिखाया गया क्योंकि पश्चिमी देशों को चिंता थी कि चीन का स्पेस प्रोग्राम पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) यानी चीन की सेना संचालित करती है। चीन का यह स्पेस स्टेशन अब चीन और अमेरिका के बीच एक नई प्रतिस्पर्धा का केंद्र बन गया है।
 
 

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