एस्टरॉयड्स को लेकर नासा लगातार ट्रैकिंग करती रहती है।
नासा अब तक 13 लाख एस्टरॉयड की पहचान कर चुकी है।
अमेरिकी एजेंसी नासा सौरमंडल में घूमने वाले एस्टरॉयड्स की ट्रैकिंग करती रहती है। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी 4.5 अरब साल पहले बनी है, जब हमारे सौरमंडल का निर्माण हुआ था। उस समय घटनाक्रम में कुछ चट्टानें भी सौरमंडल में बिखरीं रह गईं जिन्हें एस्टरॉयड या क्षुद्र ग्रह कहा जाता है। ये ग्रहों की तरह ही लगातार सूरज का चक्कर लगाते हैं। अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार एस्टरॉयड बड़ी चट्टानें होती हैं जो कि खनिज पदार्थों से बनी होती हैं।
एस्टरॉयड हमारे सौरमंडल में लगातार चक्कर लगा रहे हैं। ये चट्टानी टुकड़े जब पृथ्वी की दिशा में बहुत करीब आ जाते हैं तो नासा इनके लिए अलर्ट जारी करती है। नासा की जेट प्रॉपल्शन लेबोरेटरी एस्टरॉयड की दिशा पर नजर रखती है। JPL ने आज 2 एस्टरॉयड को लेकर अलर्ट जारी किया है जो धरती के बेहद करीब से गुजरने वाले हैं।
आज अंतरिक्ष से एस्टरॉयड 2026 HA4 धरती के करीब पहुंच रहा है, जो कि एक मकान जितना बड़ा है। एस्टरॉयड का साइज 61 फीट है। यह 15.7 लाख किलोमीटर की दूरी से गुजरने वाला है। इसी के साथ एस्टरॉयड 2026 HY2 भी धरती के करीब आ रहा है। यह एस्टरॉयड 100 फीट बड़ा है। आज यह धरती के बेहद करीब आने वाला है। जब यह पृथ्वी से न्यूनतम दूरी पर होगा तो यह केवल 19 लाख किलोमीटर दूर रह जाएगा। यह दूरी बहुत कम मानी जाती है। ऐसे में एस्टरॉयड को पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण प्रभावित कर सकता है और यह पृथ्वी की दिशा में खिंच सकता है।
नासा अब तक 13 लाख एस्टरॉयड की पहचान कर चुकी है। इनमें से हजारों एस्टरॉयड ऐसे हैं जो धरती के लिए संभावित रूप से खतरनाक एस्टरॉयड्स की श्रेणी में शामिल किए गए हैं। एस्टरॉयड्स को लेकर नासा लगातार ट्रैकिंग करती रहती है। अगर कोई एस्टरॉयड धरती से टकरा जाता है तो पृथ्वी पर बड़ी तबाही ला सकता है। हालांकि आज आने वाले एस्टरॉयड्स में से किसी के भी टकराने की संभावना नासा ने नहीं जताई है।
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हेमन्त कुमार Gadgets 360 में सीनियर ...और भी