अमेरिकी वीजा लेना है तो देनी होगी सोशल मीडिया की पूरी जानकारी, नहीं तो...

यह नियम 2019 से लागू है, लेकिन अब अमेरिकी एम्बेसी ने इसे जोर-शोर से लागू करना शुरू किया है।

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Written by नितेश पपनोई, अपडेटेड: 26 जून 2025 19:50 IST
ख़ास बातें
  • DS‑160 फॉर्म में पिछले 5 सालों के सभी सोशल मीडिया हैंडल शामिल करने होंगे
  • यह नियम 2019 से लागू है
  • प्रोफाइल्स को पब्लिक विजिबिलिटी में भी रखना होगा

सिर्फ सोशल मीडिया यूजरनेम देना ही अब काफी नहीं, प्रोफाइल को पब्लिक विजिबिलिटी में रखना होगा

भारत में अमेरिकी एम्बेसी (US Embassy in India) ने हाल ही में बड़ी वॉर्निंग दी है कि अगर कोई भारतीय अपने वीजा एप्लीकेशन से फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया डिटेल्स हटा देंगे, तो उनका वर्तमान वीजा रिजेक्ट हो सकता है और साथ ही भविष्य में US वीजा लेने से भी इनकार किया जा सकता है। इसके अलावा, साफ शब्दों में कहा गया है कि यह रूल किसी भी प्रकार की जानकारी को सोशल मीडिया से हटाए जाने पर भी लागू होगा। हाल ही में एम्बेसी ने यह भी कहा था कि वीजा एप्लिकेंट्स को उनके सोशल मीडिया प्रोफाइल को स्क्रीनिंग के लिए पब्लिक करना होगा।

X पर एक पोस्ट में US Embassy in India ने यह बताया है कि DS‑160 फॉर्म (जिसे अधिकतर नॉन‑इमिग्रेंट वीजा के लिए भरना पड़ता है) में पिछले 5 सालों के सभी सोशल मीडिया हैंडल (Facebook, X, Instagram, LinkedIn, TikTok आदि) शामिल करना अनिवार्य है। एम्बेसी के मुताबिक, "Every U.S. visa adjudication is a national security decision," यानी वीजा दिया जा रहा है या नहीं यह एक राष्ट्रीय सुरक्षा का मसला भी है।
 

यह नियम 2019 से लागू है, लेकिन अब अमेरिकी एम्बेसी ने इसे जोर-शोर से लागू करना शुरू किया है। चौकाने वाली बात यह है कि सिर्फ सोशल मीडिया यूजरनेम देना ही अब काफी नहीं, प्रोफाइल को पब्लिक विजिबिलिटी में रखना होगा ताकि कांसुलर अफसर एप्लिकेंट के पोस्ट्स, लाइक्स, कमेंट्स सब देख सकें।

अगर एप्लिकेंट की कोई प्रोफाइल प्राइवेट है, या उसने उसे वीजा फॉर्म से हटा लिया है, तो यह माना जाएगा कि वह कुछ छिपा रहा है और इसका नतीजा उसका वीजा एप्लीकेशन का इनस्टैंट रिजेक्शन या भविष्य के वीजा के लिए इनएलिजिबिलिटी हो सकता है।

विशेषकर F (स्टूडेंट), M (वोकैशनल स्टूडेंट्स) और J (एक्सचेंज विजिटर्स) वीजा के लिए यह स्ट्रिक्ट गाइडलाइन है। एम्बेसी ने कहा है कि यह उन के लिए अहम है क्योंकि यह वेरिफिकेशन और नेशनल सिक्योरिटी चेक प्रोसेस का हिस्सा है।
 

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