सिंगापुर के शोधकर्ताओं ने नई स्टडी की है जो बचपन में अधिक स्क्रीन टाइम के दुष्प्रभावों के बारे में बात करती है। Inserm और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के रिसर्चर्स की इस स्टडी से बचपन में स्क्रीन टाइम और बाद के सालों में कॉग्निटिव परफॉर्मेंस के बीच चिंताजनक संबंध सामने आए हैं।
स्मार्टफोन के अधिक संपर्क में आने से बच्चों की याददाश्त और पढ़ाई-लिखाई में उनके प्रदर्शन पर बुरा असर पड़ सकता है- स्टडी
Photo Credit: PsychCentral
अगर आप भी अपने छोटे बच्चों को तुरंत स्मार्टफोन हाथ में थमा देते हैं तो आप उन्हें दिमागी कमजोरी की तरफ धकेल रहे हैं। छोटे बच्चों को अधिक समय तक स्मार्टफोन दिखाना भविष्य में उनकी खराब दिमागी स्थिति के लिए जिम्मेदार हो सकता है। हाल ही में हुए एक नए शोध से बच्चों पर कम उम्र में स्मार्टफोन के अधिक इस्तेमाल का असर पता चला है। स्मार्टफोन के अधिक संपर्क में आने से उनकी याददाश्त और पढ़ाई-लिखाई में उनके प्रदर्शन पर बुरा असर पड़ सकता है। आइए जानते हैं नई रिसर्च कौन से खतरे की ओर इशारा करती है।
सिंगापुर के शोधकर्ताओं ने नई स्टडी की है जो बचपन में अधिक स्क्रीन टाइम के दुष्प्रभावों के बारे में बात करती है। Science Daily के अनुसार, Inserm और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के रिसर्चर्स की इस स्टडी से बचपन में स्क्रीन टाइम और बाद के सालों में कॉग्निटिव परफार्मेंस के बीच चिंताजनक संबंध सामने आए हैं। स्टडी में 502 बच्चों को शामिल किया गया और निगरानी में रखा गया। स्टडी में अलग-अलग उम्र में हर बच्चे के स्क्रीन टाइम की मात्रा पर नज़र रखी गई।
नतीजों से पता चला कि बच्चे की ग्रोथ के अहम सालों में अधिक स्क्रीन टाइम का व्यापक प्रभाव पाया गया। पाया गया कि स्क्रीन टाइम का 9 साल की उम्र तक पढ़ाई-लिखाई में कमजोर प्रदर्शन व 10.5 साल की उम्र के आसपास याद्दाश्त कमजोर होने के बीच एक अहम संबंध है। 'वर्ल्ड जर्नल ऑफ पीडियाट्रिक्स' (World Journal of Pediatrics) में प्रकाशित एक रिसर्च से पता चलता है कि स्क्रीन के संपर्क में आने का समय बहुत मायने रखता है।
स्टडी में अलग-अलग उम्र में स्क्रीन के इस्तेमाल का विश्लेषण किया गया। इससे दिमागी विकास पर स्क्रीन टाइम के लंबे समय के असर को बेहतर ढंग से समझने की कोशिश की गई। यह खास तौर पर छह अलग-अलग उम्र में स्क्रीन के इस्तेमाल का विश्लेषण करती है, ताकि दिमागी विकास पर पड़ने वाले लंबे समय के असर को बेहतर ढंग से समझा जा सके। न कि सिर्फ स्क्रीन के सामने बिताए गए कुल घंटों पर ध्यान देती है।
स्टडी में पाया गया कि जिन बच्चों ने 1 साल की उम्र में ज्यादा समय स्क्रीन के सामने बिताया, उन्हें बाद में पढ़ाई-लिखाई में कमज़ोर नतीजों और कमज़ोर वर्किंग मैमोरी का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, लगभग 6 साल की उम्र के बच्चों में भी स्क्रीन के इस्तेमाल से ऐसे ही बुरे असर देखे गए। इससे पता चलता है कि बचपन और स्कूल के शुरुआती साल स्क्रीन के संपर्क में आने के लिहाज से बहुत संवेदनशील समय होता है। ऐसे समय में बच्चों को अधिक स्क्रीन टाइम एक्सपोजर देना उनके दिमागी विकास में बाधा पैदा कर सकता है।
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हेमन्त कुमार Gadgets 360 में सीनियर ...और भी