पानी में तैरने वाले सोलर पैनल, बिजली पैदा करने के साथ बचा रहे खूब पानी, जानें क्या है तकनीक

धरती पर वैसे तो करीबन 71 प्रतिशत भाग पानी से भरा हुआ है। हालांकि, इस इसमें से सिर्फ 2.5% से 3% हिस्सा ही पानी योग्य मीठा पानी है।

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Written by साजन चौहान, अपडेटेड: 29 जून 2026 15:52 IST
ख़ास बातें
  • ऑस्ट्रेलिया में फ्लोटिंग फोटोवोल्टिक्स (FPV) सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं।
  • ये पानी के स्रोतों के ऊपर एक छत की तरह काम करते हैं।
  • ये पावर ग्रिड को रिन्यूएबल एनर्जी भी प्रदान करते हैं।

Photo Credit: Pexels/Abdulaziz hasan

धरती पर वैसे तो करीबन 71 प्रतिशत भाग पानी से भरा हुआ है। हालांकि, इस इसमें से सिर्फ 2.5% से 3% हिस्सा ही पानी योग्य मीठा पानी है और बाकी 97% खारा पानी है। दुनिया में कई देश इस समय जल संकट से जूझ रहे हैं और प्रयास कर रहे हैं कि कैसे पानी को बचाया जाए। इसी बीच ऑस्ट्रेलिया भी जल संकट का सामना कर रहा है। देश में पानी की सबसे ज्यादा खपत खेती में होती है जो कि देश का करीबन 70 प्रतिशत पानी का हिस्सा है। अब देश में पानी की सप्लाई से बचने के लिए नए तरह का फ्लोटिंग सोलर पैनल तैयार किए हैं, जिससे पानी का बचाव होता है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

तैरते हुए सोलर पैनल

  • ऑस्ट्रेलिया में फ्लोटिंग फोटोवोल्टिक्स (FPV) सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं।
  • ये सोलर पैनल बांधों और जलाशयों के ऊपर लगाए जाते हैं।
  • ये पानी के स्रोतों के ऊपर एक छत की तरह काम करते हैं, जिससे पानी की सतह ढक जाती है और वाष्पीकरण से बचाव होता है।
  • ये पावर ग्रिड को रिन्यूएबल एनर्जी भी प्रदान करते हैं।

पानी भाप बनकर नहीं उड़ेगा
रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया के बांधों और जलाशयों से हर साल करीबन 1,400 गीगालीटर पानी भाप बनकर उड़ जाता है। ये फ्लोटिंग सोलर पैनल बहुत सारा पानी बचा सकते हैं। इन पैनल को बनाने वाली कंपनी दावा करती है कि ये पैनल भाप बनने वाले पानी को आधे से भी कम कर सकते हैं। पानी के बचाव के लिए ऑस्ट्रेलियन रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी ने एक पहल में 8.5 मिलियन डॉलर का निवेश किया है। इसके तहत सिंचाई वाले खेतों में और ज्यादा फ्लोटिंग सोलर पैनल लगा जाएंगे।

वैनॉन वॉटर के पास अभी ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े फ्लोटिंग सोलर पैनल सिस्टम में से एक है। यह सिस्टम साउथ विक्टोरिया के वॉर्नम्बूल में ब्रायर्ली बेसिन पर हर साल 600,000 किलोवाट-घंटे से ज्यादा रिन्यूएबल बिजली बनती है। इस नेटवर्क में लगे 1,260 पैनल सीधी धूप लेने के साथ-साथ नीचे पानी की सतह से टकराकर आने वाली धूप को भी सोखते हैं। इन्होंने हर साल लगभग 600 टन ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में मदद की है। इसी प्रकार गिप्पसलैंड वॉटर ने भी 644 फ्लोटिंग सोलर पैनल लगाए हैं, जो अपनी पूरी क्षमता पर हर दिन 90 घरों को बिजली देने के लिए उचित किलोवाट बिजली पैदा कर रहे हैं।

फ्लोटिंग सोलर पैनल की खासयतें
फ्लोटिंग सोलर पैनल पानी के स्रोत को पूरी तरह से नहीं ढकते है जैसा कि आम तौर पर पानी के वाष्पीकरण को कम करने के लिए अन्य तरीकों में होता है। इससे शैवाल पनपने का खतरा नहीं रहता और पानी साफ रहता है। इन फायदों के चलते फ्लोटिंग सोलर पैनल ऑस्ट्रेलिया में तेजी के साथ अपनाएं जा रहे हैं।

 

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ये भी पढ़े: , Floating Solar Panel, Australia, Solar Energy, Green Energy

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