ANPR कैमरा नंबर प्लेट स्कैन करके वाहन की जानकारी डेटाबेस से मिलाता है। जानिए कैसे इससे फ्यूल देने का फैसला हो सकता है।
ANPR कैमरा नंबर प्लेट स्कैन करके गाड़ी का इंश्योरेंस और फ्यूल स्टेटस चेक कर सकता है
Photo Credit: AI Generated
पेट्रोल पंप पर गाड़ी पहुंचते ही अगर कैमरा उसकी नंबर प्लेट पढ़कर यह बता दे कि उसमें पेट्रोल या डीजल भरा जाना है या नहीं, तो यह किसी साइंस-फिक्शन फिल्म जैसा लग सकता है। लेकिन अब भारत में इसी तरह की टेक्नोलॉजी पर काम हो रहा है। ANPR यानी Automatic Number Plate Recognition कैमरा नंबर प्लेट को पढ़कर वाहन की जानकारी डेटाबेस से मिलान कर सकता है। इसी तकनीक का इस्तेमाल पहले से दिल्ली-NCR में End-of-Life यानी तय उम्र पूरी कर चुके व्हीकल्स को फ्यूल देने से रोकने के लिए किया जा रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बिना वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस वाले वाहनों को फ्यूल देने से रोकने के लिए भी इसी तरह का सिस्टम पायलट आधार पर तैयार किया जा रहा है।
ANPR कैमरा सामान्य CCTV से अलग तरीके से काम करता है। कैमरा वाहन की नंबर प्लेट की तस्वीर लेता है और उसका नंबर पढ़कर उसे डिजिटल टेक्स्ट में बदल देता है। इसके बाद यह नंबर संबंधित डेटाबेस से मिलाया जा सकता है। दिल्ली में इस सिस्टम को VAHAN डेटाबेस से जोड़कर End-of-Life वाहनों, यानी वो गाड़ी जिनकी 10 या 15 साल की लाइफ पूरी हो चुकी है, की पहचान करने की व्यवस्था की गई है। नंबर प्लेट से मिले डेटा के आधार पर सिस्टम वाहन की उम्र और दूसरी रजिस्ट्रेशन डिटेल्स देख सकता है। अगर व्हीकल नियम के दायरे में आता है, तो पेट्रोल पंप के स्टाफ को फ्यूल नहीं देने का अलर्ट दिया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2026 में IRDAI को MoRTH के साथ मिलकर ऐसे पायलट प्रोजेक्ट पर काम करने को कहा था, जिसमें वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस और फ्यूल की बिक्री के बीच संबंध की संभावना जांची जाए। इसका मतलब यह है कि भविष्य में पेट्रोल पंप पर नंबर प्लेट स्कैन होने के बाद व्हीकल का इंश्योरेंस स्टेटस भी चेक किया जा सकता है।
मौजूदा प्रस्ताव में ANPR से मिले वाहन नंबर को भारतीय बीमा सूचना ब्यूरो (IIB) और VAHAN के रिकॉर्ड से मिलाने की बात सामने आई है। अगर रिकॉर्ड में वैलिड थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस नहीं मिलता है, तो सिस्टम वाहन को फ्लैग कर सकता है। हालांकि, यह अभी पायलट प्रोजेक्ट की तैयारी है।
ANPR का इस्तेमाल सिर्फ इंश्योरेंस के लिए नहीं हो रहा है। दिल्ली-NCR में End-of-Life वाहनों की पहचान और उन्हें फ्यूल देने से रोकने के लिए इस टेक्नोलॉजी को पेट्रोल पंपों पर लगाया गया है। CAQM के अनुसार ANPR सिस्टम को VAHAN से जोड़कर EoL वाहनों और कुछ दूसरे नियमों के उल्लंघन की पहचान की जा सकती है। सितंबर 2026 में हरियाणा ने भी गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर में पेट्रोल पंपों पर 775 ANPR कैमरे लगाने की योजना की घोषणा की है। वहां 1 अक्टूबर से End-of-Life वाहनों को ईंधन देने पर रोक लागू करने की तैयारी है।
सिर्फ कैमरा नंबर पढ़ता है, पूरा सिस्टम कैमरा, सॉफ्टवेयर और सरकारी डेटाबेस के बीच कनेक्शन से काम करता है। नंबर प्लेट की पहचान के बाद डेटाबेस से मिली जानकारी के आधार पर वाहन को नियमों के मुताबिक फ्लैग किया जा सकता है और पेट्रोल पंप स्टाफ को फ्यूल नहीं देने का संकेत मिल सकता है।
हालांकि, सिस्टम की सटीकता और अलग-अलग राज्यों के डेटाबेस का आपस में जुड़ना बड़ी चुनौती है। दिल्ली सरकार ने पहले ANPR सिस्टम में कैमरा प्लेसमेंट, सेंसर, HSRP और दूसरे NCR राज्यों के डेटाबेस से इंटीग्रेशन जैसी तकनीकी दिक्कतों की बात भी उठाई थी।
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