नेतान्याहू के इस प्लान का बैंक ऑफ इजरायल ने कड़ा विरोध किया है। बैंक ऑफ इजरायल ने कहा है कि प्रतिबंधों से निपटने के लिए क्रिप्टोकरेंसीज का रास्ता नहीं अपनाया जा सकता है
कुछ देशों ने इजरायल पर प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है
पिछले कई वर्षों से कुछ देशों के साथ विवादों में उलझे इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े प्लान को झटका लगा है। कुछ देशों की ओर से इजरायल पर प्रतिबंध लगाए जाने की आशंका के कारण नेतान्याहू ने कहा था कि इससे निपटने के लिए क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किया जा सकता है।
समाचार एजेंसी Reuters की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले महीने ब्रिटन, कनाडा और फ्रांस ने कहा था कि वे इजरायल से कुछ इम्पोर्ट पर रोक लगाएंगे। ये प्रतिबंध फलस्तीन के साथ विवादास्पद क्षेत्र को लेकर इजरायल की पॉलिसी को निशाना बनाने के लिए लगाए जा सकते हैं। इसके बाद नेतान्याहू ने एक इंटरव्यू में बताया था, "इजरायल और बैंकों पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इस वजह से आपको बायपास इकोनॉमी तैयार करने की जरूरत है। इन प्रतिबंधों से निपटने के लिए करेंसीज मौजूद हैं। हम इस पर कार्य कर रहे हैं।" यह पूछने पर कि क्या वह क्रिप्टोकरेंसी का जिक्र कर रहे हैं, नेतान्याहू का जवाब था, "बिल्कुल।" इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी भी एक संभावना है।
हालांकि, नेतान्याहू के इस प्लान का बैंक ऑफ इजरायल ने कड़ा विरोध किया है। बैंक ऑफ इजरायल ने कहा कि प्रतिबंधों से निपटने के लिए क्रिप्टोकरेंसीज का रास्ता नहीं हो सकता है। राजनताओं को ऐसी पॉलिसी पर ध्यान देना चाहिए जिससे इस तरह के उपाय गैर जरूरी हो जाएं। बैंक ऑफ इजरायल का कहना था, "इजरायल की इकोनॉमी के लिए सही रास्ता हमारे मुख्य ट्रेडिंग पार्टनर्स के साथ इकोनॉमिक संबंधों को बचाने और प्रतिबंधों और इकोनॉमी पर इनके नकारात्मक असर से बचने पर ध्यान देने का है।"
इस वर्ष की शुरुआत से इजरायल और ईरान के बीच युद्ध चल रहा है। इसमें दोनों देशों को भारी नुकसान हुआ है। इस युद्ध में इजरायल को अमेरिका का समर्थन मिल रहा है। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में अमेरिकी प्रेसिडेंट Donald Trump और नेतान्याहू के बीच तनाव के संकेत भी दिखे हैं। इजरायल के कई इकोनॉमिस्ट्स और नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल के नेतान्याहू के प्रपोजल के खिलाफ लिखे एक पत्र में कहा है कि इससे बेरोजगारी में बढ़ोतरी होगी और विदेशी से निवेश में भी गिरावट आएगी। दुनिया में इजरायल की इकोनॉमिक स्थिति को इससे बड़ा नुकसान होगा।
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