Chandrayaan-3 vs Luna-25 : 11 अगस्‍त को शुरू हो रहा रूस का मिशन क्‍या हमसे पहले पहुंच जाएगा चांद पर? जानें

Chandrayaan-3 vs Luna-25 : रूस के लूना-25 स्‍पेसक्राफ्ट को चांद तक उड़ान भरने में सिर्फ 5 दिन लगेंगे।

विज्ञापन
Written by प्रेम त्रिपाठी, अपडेटेड: 8 अगस्त 2023 12:26 IST
ख़ास बातें
  • चंद्रयान 3 से कई दिनों बाद लॉन्‍च हो रहा रूस का मून मिशन
  • रूस का कहना है कि वह 5 दिनों में मिशन चांद पर पहुंचा देगा
  • दोनों मिशन एकसाथ या आगे-पीछे लैंड कर सकते हैं चांद पर

नासा से लेकर चीन की अंतरिक्ष एजेंसी और रूस 4 से 5 दिनों में अपना स्‍पेसक्राफ्ट चंद्रमा पर पहुंचा रहे हैं। इसरो यह काम 40 दिनों में पूरा कर रही है।

भारत के चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) मिशन ने 14 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से उड़ान भरी थी। इसरो की योजना चंद्रयान-3 को 23 अगस्‍त की शाम चांद पर लैंड कराने की है। अबतक दावा किया जा रहा था कि चंद्रयान-3, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करने वाला दुनिया का पहला मिशन होगा। लेकिन इस मिशन को रूस ने चुनौती दे दी है! रूस का लूना-25 (Luna-25) स्‍पेसक्राफ्ट 11 अगस्‍त को चांद के सफर पर निकलेगा। यह भी दक्षिणी ध्रुव पर ही लैंड करेगा। कहा जा रहा है कि लूना-25 स्‍पेसक्राफ्ट, चंद्रयान-3 से पहले चांद पर पहुंच सकता है। क्‍या यह सच है? अगर हां, तो ऐसा कैसे मुमकिन है, आइए जानते हैं।   
 

क्‍या कहना है रूसी स्‍पेस एजेंसी का

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में रूसी स्‍पेस एजेंसी रोस्कोस्मोस (Roscosmos) के हवाले से बताया गया है कि रूस के लूना-25 स्‍पेसक्राफ्ट को चांद तक उड़ान भरने में सिर्फ 5 दिन लगेंगे। रूस ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने के लिए 3 संभावित जगहों की पहचान की है। हालांकि लैंडिंग से पहले लूना-25 स्‍पेसक्राफ्ट, चंद्रमा की कक्षा में 5 से 7 दिनों तक रहेगा। रिपोर्ट कहती है कि दोनों मिशन साथ-साथ या फ‍िर लूना-25 स्‍पेसक्राफ्ट पहले ही चांद पर लैंड कर सकता है। 
 

आखिर ऐसा कैसे मुमकिन है? 

अमेरिकी स्‍पेस एजेंसी नासा (Nasa) से लेकर चीन की अंतरिक्ष एजेंसी और अब रूस 4 से 5 दिनों में अपना स्‍पेसक्राफ्ट चंद्रमा पर पहुंचा रहे हैं। इसके मुकाबले, इसरो इस काम को 40 दिनों में पूरा कर रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार, पृथ्‍वी के गुरुत्‍वाकर्षण से बाहर न‍िकलने के लिए पावरफुल रॉकेट की जरूरत होती है। सीधे चंद्रमा पर पहुंचना हो, तो और भी ज्‍यादा ताकतवर रॉकेट चाहिए। अमेरिका और चीन ने बेहद पावरफुल रॉकेट का इस्‍तेमाल करके चांद का सफर 4 दिनों में पूरा कर लिया। रूस भी यही करने जा रहा है। इस काम में बहुत ज्‍यादा ईंधन और पैसा लगता है। वहीं, इसरो बेहद कम ईंधन और कम बजट में चंद्रमा पर मिशन भेज रही है। इसीलिए उसे 40 दिन लग रहे हैं। 
 

तो क्‍या बाकी देशों से पीछे रह गए हम? 

ऐसा बिलकुल नहीं है। रूस और भारत दोनों का ही मकसद चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचना है। यह काम बिना किसी रुकावट के पूरा हो जाए, यह बड़ी जीत होगी। चांद तक जल्‍दी पहुंचकर भी अगर रूस मिशन में फेल होता है, तो यह उसके लिए झटका होगा। चंद्रमा पर जल्‍दी पहुंचना बड़ी बात नहीं है। वहां मिशन को सफलता से लैंड कराना बड़ी उपलब्‍धि होगी। 

 
 

लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स 360 एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें।

Advertisement
Popular Brands
#ट्रेंडिंग टेक न्यूज़
  1. HMD Vibe 2 5G की जबरदस्त डिमांड, सेल शुरू होने के 1 घंटे में बिक गया फोन
#ताज़ा ख़बरें
  1. Xiaomi 17T जल्द होगा भारत में लॉन्च, MediaTek Dimensity 8500 Ultra चिपसेट
  2. Honor Magic 9 के जल्द लॉन्च की तैयारी, 8,000mAh हो सकती है बैटरी
  3. Apple कर रहा आईफोन एंटी स्नैचिंग फीचर पर काम, चोरी होने पर होगा अपने आप लॉक, जानें सबकुछ
  4. स्क्रू कसने और खोलने का काम होगा आसान, Xiaomi ने लॉन्च किया नया स्मार्ट इलेक्ट्रिक टूल
  5. Lava Bold N2 5G जल्द होगा भारत में लॉन्च, डुअल रियर कैमरा यूनिट
  6. Jio ने पेश किया OTT Pass, 30GB डाटा के साथ 12+ OTT ऐप, लाइव चैनल के साथ ऐसे फायदे, जानें कीमत
  7. बढ़ते AI मार्केट ने की Samsung कर्मचारियों की चांदी, बोनस में मिलेंगे ₹3.28 करोड़!
  8. Oppo Find X10 में मिल सकती है 8,000mAh की दमदार बैटरी
  9. सरकार दे रही फ्री Cyber Security Course, सिर्फ 2.5 घंटे में मिलेगा सर्टिफिकेट, ऐसे करें अप्लाई
  10. Amazon Echo Dot Max, Echo Studio 3 गुना ज्यादा Bass और Dolby Atmos के साथ भारत में लॉन्च, जानें कीमत
Download Our Apps
Available in Hindi
© Copyright Red Pixels Ventures Limited 2026. All rights reserved.