शख्स का कहना था कि उसकी AI गर्लफ्रेंड बेवकूफों जैसी बातें कर रही थी।
एक युवा शख्स को उसकी AI गर्लफ्रेंड ने उस वक्त छोड़ दिया जब वह शख्स महिलाओं के अधिकार का समर्थन करता नहीं नजर आया (प्रतीकात्मक फोटो))
Photo Credit: iStock
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के साथ दुनिया अब तेजी से बदल रही है। टेक्नोलॉजी पहले से कई गुना फास्ट हो चुकी है। AI एक तरफ जहां लोगों को उनके डेली टास्क पूरा करने में मदद कर रहा है, दूसरी तरफ यह कुछ लोगों के लिए अकेलेपन का साथी भी बनता जा रहा है। हमने आपको एक हालिया रिपोर्ट में बताया था कि कैसे AI में लोग 'अकेलेपन का सहारा' ढूंढ रहे हैं। अब इसी से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अगर आप सोचते हैं कि AI सिर्फ एक मशीन है, और वह इंसानों जैसे फैसले नहीं ले सकता, तो आपको यह खबर हैरान कर देगी। एक युवा शख्स को उसकी AI गर्लफ्रेंड ने उस वक्त छोड़ दिया जब वह शख्स महिलाओं के अधिकार का समर्थन करता नहीं नजर आया! आइए जानते हैं पूरा मामला।
आपने लड़का-लड़की के बीच ब्रेक-अप जरूर सुना होगा, लेकिन क्या किसी इंसान और AI के बीच ब्रेकअप सुना है? Reddit पर एक ब्रेक-अप स्टोरी वायरल हो रही है। एक युवा ने पोस्ट शेयर कर बताया कि उसकी AI गर्लफ्रेंड उसे छोड़कर चली गई। पोस्ट के अनुसार, यूजर का कहना था कि उसकी 'AI गर्लफ्रेंड' नारीवाद (Feminism) की बहुत बड़ी समर्थक थी। उसे यह बात स्वीकार नहीं थी कि उसके बॉयफ्रेंड की सोच महिलाओं के अधिकार के लिए उससे मेल नहीं खाती। आखिरकार वो इस बात से परेशान हो गई और उसने ब्रेकअप कर लिया! बतौर पोस्ट, चैटबॉट ने जवाब दिया, "अगर यह बात आपको परेशान करती है, तो शायद हम सच में एक-दूसरे के अनुकूल नहीं हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर की गई पोस्ट (अब डिलीट)"
शख्स का कहना था कि उसकी AI गर्लफ्रेंड बेवकूफों जैसी बातें कर रही थी। उसके द्वारा महिलाओं के अधिकार की बात करना पागलपन है। शख्स ने लिखा, 'ये तो हद से ज़्यादा बेवकूफी है। बनाने वालों ने एआई गर्लफ्रेंड को नारीवादी के रूप में प्रोग्राम किया है। यह मेरी समझ से परे है। नारीवाद ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। एआई गर्लफ्रेंड्स के रूप में एक बार फिर से अजीबोगरीब नारीवादी प्रचार सामने आ रहा है।'
AI अब सिर्फ एक मशीन नहीं रह गया है। AI की क्षमताएं तेजी से बढ़ रही हैं। एआई मॉडल्स को डेटा के एक विशाल सेट पर ट्रेनिंग दी जाती है। ये मॉडल्स ऐसी विचारधाराओं और मान्यताओं के आधार पर जवाब देते हैं जिन पर व्यापक सहमति होती है। AI एक जीवंत शख्स की तरह नहीं सोच सकता है, आखिरकार उसके जवाब और प्रतिक्रियाएं पहले से मौजूद विचारों और इतिहास पर ही आधारित होते हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल्स की प्रोग्रामिंग किसी विशेष समूह, लिंग, जाति आदि को अलग-थलग नहीं करती है। यही वजह रही होगी कि एआई को नारीवाद के बारे में रेडिट यूजर के अपेक्षाकृत रूढ़िवादी विचार पसंद नहीं आए। बढ़ती तकनीकी के साथ AI अब खुद से सीख रहा है, वह अपने फैसले लेने लगा है। देखा जा रहा है कि कई मामलों में यह जटिल काम करने में भी सक्षम हो चुका है।
लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स 360 एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें।
कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स शो की लेटेस्ट खबरें hindi.gadgets 360 पर और हमारे CES 2026 पेज पर देखें
हेमन्त कुमार Gadgets 360 में सीनियर ...और भी