Surya Grahan 2023 : 20 अप्रैल को लगने जा रहा है हाइब्रिड सूर्य ग्रहण, क्‍या भारत में दिखाई देगा? जानें

Surya Grahan 2023 : सूर्य ग्रहण तब होता है जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी पूरी तरह या आंशिक रूप से एक सीध में आ जाते हैं।

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Written by प्रेम त्रिपाठी, अपडेटेड: 12 अप्रैल 2023 12:14 IST
ख़ास बातें
  • हाइब्रिड सूर्य ग्रहण 20 अप्रैल को लगेगा
  • यह भारत में दिखाई नहीं देगा
  • अमेरिका से भी इस ग्रहण को देखा नहीं जा सकेगा

यह ग्रहण सुबह 07:06 बजे से 12:29 बजे तक प्रभावी होगा। हालांकि भारत में यह नहीं दिखाई देगा।

Photo Credit: Unsplash

Solar Eclipse 2023 : साल 2023 का पहला सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। जानकारी के अनुसार, 20 अप्रैल 2023 को हिंद और प्रशांत महासागर के कुछ इलाकों में एक दुर्लभ हाइब्रिड सूर्य ग्रहण (hybrid solar eclipse) देखा जा सकेगा। कई लोगों के मन में यह सवाल है कि क्‍या यह सूर्य ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा। हाइब्रिड सूर्य ग्रहण होता क्‍या है? इसकी टाइमिंग क्‍या होगी? हाइब्रिड सूर्य ग्रहण बाकी सूर्य ग्रहण से कैसे अलग है? ऐसे तमाम सवालों के जवाब हम आपको देने जा रहे हैं।  

गौरतलब है कि सूर्य ग्रहण तब होता है जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी पूरी तरह या आंशिक रूप से एक सीध में आ जाते हैं। वो किस तरह से सीध में आते हैं, उसी के आधार पर ग्रहण का अनूठा दृश्‍य उभरता है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार, सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरता है। इससे पृथ्वी पर एक छाया पड़ती है जो कुछ क्षेत्रों में सूर्य के प्रकाश को पूरी तरह या आंशिक रूप से रोक देती है।
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हाइब्रिड सूर्य ग्रहण थोड़ा अलग होता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि पृथ्वी की सतह घुमावदार है। कभी-कभी एक ग्रहण वलयाकार (annular) और पूर्ण ग्रहण के बीच शिफ्ट हो सकता है, क्योंकि चंद्रमा की छाया दुनियाभर से गुजर रही होती है, इसलिए इसे हाइब्रिड सूर्य ग्रहण कहते हैं। आसान भाषा में समझें तो यह आंशिक, पूर्ण और वलयाकार सूर्य ग्रहण का मिश्रण होता है और कुछ सेकंड के लिए नजर आता है। 

Sky.org के अनुसार, हाइब्रिड सूर्य ग्रहण 20 अप्रैल को लगेगा। भारतीय समय के अनुसार, यह ग्रहण सुबह 07:06 बजे से  12:29 बजे तक प्रभावी होगा। हालांकि भारत में यह नहीं दिखाई देगा। यह ग्रहण पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया, पूर्वी तिमोर और पूर्वी इंडोनेशिया से दिखाई देगा। भारत के अलावा अमेरिका से भी इस ग्रहण को देखा नहीं जा सकेगा। इन इलाकों में कुछ लोगों को पूर्ण सूर्यग्रहण दिखाई देगा, जबकि कई लोगों को ‘रिंग ऑफ फायर' यानी वलयाकार ग्रहण दिखाई देगा। कई लोग आशिंक सूर्य ग्रहण देख पाएंगे। कहा जा रहा है कि ऐसी खगोलीय घटना 100 साल में एक बार होती है। 
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