टक्कर के समय यह हिस्सा 8700 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार पर होगा। यह स्पीड ध्वनि की गति से 7 गुना ज्यादा है।
Space X के Falcon 9 रॉकेट का एक हिस्सा चांद से टकराएगा। यह टक्कर 5 अगस्त 2026 के दिन होने वाली है। (सांकेतिक फोटो))
अंतरिक्ष में आने वाले दिनों में एक जबरदस्त टक्कर होने वाली है। यह टक्कर चांद पर होगी। यानी एक टुकड़ा चांद से टकराने वाला है जिसका खुलासा अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने किया है। इस टक्कर का संबंध एलन मस्क की कंपनी Space X से है। वैज्ञानिकों ने कहा है कि अगस्त में यह टक्कर होना निश्चित है। यह टक्कर Space X के रॉकेट से होने वाली है। तो क्या अंतरिक्ष में कोई बड़ी घटना घटने जा रही है? क्या इसका असर धरती पर भी होगा। आइए जानते हैं विस्तार से।
चांद पर एक बड़ा धमाका होने वाला है। Space X के Falcon 9 रॉकेट का एक हिस्सा चांद से टकराएगा। यह टक्कर 5 अगस्त 2026 के दिन होने वाली है। स्वतंत्र खगोलविद बिल ग्रे की ओर से यह अनुमान लगाया गया है। जिन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल X से एक पोस्ट के जरिए इस टक्कर के बारे में विस्तार से बताया है।
बिल ग्रे दरअसल नियर अर्थ ऑब्जेक्ट्स को ट्रैक करते हैं। यानी ऐसी खगोलीय वस्तुएं जो पृथ्वी के आसपास मंडराती रहती हैं। बिल ग्रे Project Pluto सॉफ्टवेयर के जरिए इनको ट्रैक करते हैं। Science Alert की रिपोर्ट के मुताबिक, इस टकराने वाली वस्तु का नाम 2025-010D है। यह चांद से 2.44 AM EDT पर टकराएगी। यह टक्कर Einstein क्रेटर के पास होगी। यह वस्तु दरअसल Falcon 9 रॉकेट का अपर स्टेज का हिस्सा है। यह 45 फीट बड़ा है और रॉकेट को जनवरी 2025 में लॉन्च किया गया था। टक्कर के समय यह टुकड़ा 8700 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार पर होगा। यह स्पीड ध्वनि की गति से 7 गुना ज्यादा है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह टक्कर नंगी आंखों से नहीं देखी जा सकेगा। इसे स्टडी करने के लिए चंद्र अन्वेषण कक्षक का इस्तेमाल किया जाएगा। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि वे नए बने गड्ढे की तस्वीरें खींच सकेंगे और चंद्रमा की सतह के नीचे से निकले पदार्थ का विश्लेषण कर सकेंगे। स्पेसएक्स द्वारा विकसित फाल्कन 9 एक आंशिक रूप से रीयूजेबल रॉकेट है। यह लगभग 70 मीटर ऊँचा और प्रक्षेपण के समय लगभग 550,000 किलोग्राम वजनी होता है। इस रॉकेट का पहला चरण पुन: उपयोग के लिए पृथ्वी पर वापस लौटने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जबकि दूसरा चरण आमतौर पर अपना मिशन पूरा करने के बाद अंतरिक्ष में ही रहता है।
चांद पर गिरने वाला अपर स्टेज जनवरी 2025 में लॉन्च किए गए फाल्कन 9 मिशन का हिस्सा था, जिसमें ब्लू घोस्ट मिशन 1 और हाकुटो-आर मिशन 2 मून लैंडर्स समेत कई चंद्र पेलोड ले जाए गए थे। आमतौर पर अपर स्टेज या तो वायुमंडल में भस्म हो जाते हैं या फिर सोलर ऑर्बिट में निकल जाते हैं। लेकिन यह हिस्सा काफी लम्बे समय तक यहां फंसा रह गया और पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगाता रहा। यह 26 दिन में पृथ्वी का एक चक्कर पूरा कर लेता है।
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हेमन्त कुमार Gadgets 360 में सीनियर ...और भी