नमक से चलेंगे EV और घर के इनवर्टर! आ गई है Saltwater Battery, जानें पूरी तकनीक

Saltwater बैटरियां नमक-आधारित इलेक्ट्रोलाइट से चलती हैं, सुरक्षित हैं, सस्ती हैं और भविष्य में EV व ग्रिड स्टोरेज में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।

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Written by नितेश पपनोई, अपडेटेड: 9 दिसंबर 2025 11:12 IST
ख़ास बातें
  • Saltwater बैटरियां ज्यादा सुरक्षित, नॉन-फ्लेमेबल और किफायती ऑप्शन
  • दुनिया में सॉल्ट बैटरी रिसर्च तेज, खासकर ग्रिड स्टोरेज के लिए
  • एनर्जी डेंसिटी बढ़े तो EVs में Saltwater बैटरियों का बड़ा भविष्य

Photo Credit: AI-generated image

पैट्रोल-डीजल से दूर और बैटरी-ऑपरेटिड भविष्य की ओर चलते हुए, बैटरियों की दुनिया में एक नया नाम सुनाई दे रहा है - Saltwater बैटरियां। जैसा कि नाम से पता चलता है, ये बैटरियां पारंपरिक लिथियम-आयन की तरह खतरनाक रसायनों और दुर्लभ धातुओं पर भरोसा नहीं करतीं। इनका इलेक्ट्रोलाइट एक सॉल्ट-वाटर सॉल्यूशन (या सॉल्ट आधारित सॉलिड इलेक्ट्रोलाइट) होता है, जो सादे नमक या सोडियम जैसे अधिक उपलब्ध, सस्ते और सुरक्षित मटीरियल पर आधारित है। चलिए इस आर्टिकल में इसी भविष्य की टेक्नोलॉजी के बारे में बात करते हैं।

कैसे काम करती है Saltwater बैटरियां? दरअसल इनमें चार्जिंग/डिस्चार्जिंग के दौरान सोडियम-आयन (या अन्य आयन) इलेक्ट्रोलाइट से इलेक्ट्रोड्स के बीच आते-जाते हैं। यह प्रोसेस लिथियम-आयन बैटरियों की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित होता है, क्योंकि इनमें फायर या थर्मल रनअवे का जोखिम बहुत कम होता है। 

Saltwater Battery के फायदे

कम रिस्क, ज्यादा सेफ्टी। Saltwater बैटरियां नॉन-फ्लेमेबल होती हैं, यानी ओवरचार्ज या दुर्घटना की स्थिति में आग लगने या धमाके का खतरा नहीं रहता। इसके अलावा, एक फायदा इसमें लगने वाले कंपोनेंट्स और रिसोर्सेज की आसान उपलब्धता है। उदाहरण के लिए नमक, सोडियम, मैंगनीज जैसे मटीरियल्स धरती पर आसानी से मिल जाते हैं, इसलिए बैटरी की लागत तुलनात्मक रूप से कम हो सकती है। 

वहीं, एक अन्य फायदा एनर्जी स्टोरेज और ग्रिड यूसेज के लिए अनुकूलता भी है। जलवायु कंट्रोल्ड पॉवर बैकअप, सोलर-पैनल स्टोरेज या माइक्रोग्रिड्स में Saltwater बैटरियां अच्छा ऑप्शन हो सकती हैं, क्योंकि ये तापमान और पर्यावरण के असर को बेहतर तरीके से झेलने की क्षमता रखती है। 

चुनौतियां और अभी क्या कमी है

हालांकि Saltwater बैटरियां कई फायदे देती हैं, लेकिन अभी ये पूरी तरह EV (इलेक्ट्रिक कार/स्कूटर) की बैटरी की जगह लेने को तैयार नहीं हैं, मुख्य वजह है एनर्जी डेंसिटी। लिथियम-आयन बैटरियों की तुलना में, फिलहाल Saltwater बैटरियां वजन या आकार के हिसाब से कम ऊर्जा स्टोर करती हैं। यानी जितनी दूरी चलनी है, उसके लिए बैटरी या तो बहुत बड़ी होगी, या रेंज कम हो सकती है। 

इसके अलावा, कमर्शियलाइजेशन अभी सीमित है। बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन नहीं होने की वजह से कीमत, सप्लाई चेन और तकनीकी परफॉर्मेंस जैसी चुनौतियां बरकरार हैं। 

दुनिया में कहां तक आइडिया पहुंचा है

ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के रिसर्चर्स मिलकर Salt-battery जैसे सॉलिड-स्टेट सॉल्ट बैटरियों पर काम कर रहे हैं, जिन्हें ग्रिड स्टोरेज और ऑफ-ग्रिड सोलर पैनल्स के बैकअप के लिए तैयार किया जा रहा है। उन बैटरियों में पारंपरिक बैटरियों की तुलना में कम खर्च, ज्यादा सेफ्टी और लंबे साइकिल मिलने का दावा किया गया है। 

चीन जैसी जगहों पर Sodium-ion (नमक आधारित) बैटरियों की ओर कदम तेजी से बढ़ रहा है, खासकर इलेक्ट्रिक स्कूटर और छोटे EVs में, क्योंकि वहां सरकार और EV कंपनियां सस्ता, सुरक्षित और कम-मैटीरियल वाले बैटरी चाह रही हैं। 

क्या भविष्य है Saltwater बैटरियों का?

Saltwater बैटरियां अभी पूरी तरह लिथियम-आयन का ऑप्शन नहीं बनी हैं, लेकिन उनकी सेफ्टी, सादगी और पर्यावरण-अनुकूलता उन्हें भविष्य की बैटरी टेक्नोलॉजी में एक मजबूत दावेदार बनाती है। अगर एनर्जी डेंसिटी और पैकिंग से जुड़ी चुनौतियां हल हो जाएं, तो इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, सोलर ग्रिड स्टोरेज और रोजमर्रा के बैकअप पावर सिस्टम्स में इनका इस्तेमाल आम हो सकता है।

भारत जैसे देश, जहां बैटरी कच्चा माल और पारंपरिक बैटरियों की आपूर्ति और रिसाइकलिंग बड़ी चुनौती है, Saltwater बैटरियां एक अच्छी एनवायरमेंट-फ्रेंडली और कॉस्ट-इफेक्टिव ऑप्शन साबित हो सकती हैं, खासकर ग्रामीण और ऑफ-ग्रिड इलाकों में।

Saltwater बैटरी क्या होती है?

Saltwater बैटरी एक ऐसी बैटरी है जिसमें इलेक्ट्रोलाइट के तौर पर नमक या सोडियम आधारित सॉल्यूशन/सॉलिड इलेक्ट्रोलाइट इस्तेमाल किया जाता है। इसमें लिथियम, कोबाल्ट जैसे दुर्लभ और महंगे मटीरियल नहीं लगते।

क्या Saltwater बैटरियां इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में इस्तेमाल की जा सकती हैं?

अभी सीधे तौर पर नहीं, क्योंकि इनकी एनर्जी डेंसिटी लिथियम-आयन के मुकाबले कम है। यानी समान रेंज के लिए ज्यादा बड़ी बैटरी चाहिए। लेकिन रिसर्च जारी है और भविष्य में ये EVs के लिए मजबूत ऑप्शन बन सकती हैं।

Saltwater बैटरियों को सुरक्षित क्यों माना जाता है?

ये नॉन-फ्लेमेबल होती हैं, इनमें आग लगने, फटने या थर्मल रनअवे का जोखिम बेहद कम है। ओवरचार्जिंग या तापमान बदलने पर भी ये स्थिर रहती हैं।

दुनिया में Saltwater बैटरियों पर रिसर्च कहां हो रही है?

ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और यूरोप में Salt-बेस्ड सॉलिड-स्टेट बैटरियों पर रिसर्च तेजी से चल रही है। वहीं चीन में सोडियम-आयन बैटरियां इलेक्ट्रिक स्कूटर्स और छोटे EVs में ट्रायल पर हैं।

भारत में Saltwater बैटरियों का क्या भविष्य है?

भारत में कच्चे माल की उपलब्धता, कम लागत और एनवायरमेंट-फ्रेंडली बैटरी ऑप्शन की जरूरत को देखते हुए यह तकनीक ग्रामीण क्षेत्रों, सोलर ग्रिड स्टोरेज और ऑफ-ग्रिड सिस्टम्स में बड़ी भूमिका निभा सकती है। EV के लिए भी भविष्य ब्राइट है, अगर एनर्जी डेंसिटी की समस्या हल हो जाए तो।

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ये भी पढ़े: saltwater, Saltwater Battery, Battery, Battery tech
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