इलेक्ट्रिक कार या CNG कार, जानें किसे खरीदना सही विकल्प? पर्यावरण को किससे है ज्यादा नुकसान

भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल ही पर्यावरण के अनुकूल नजर आ रहा है। मगर फिलहाल के लिए अगर लागत और खर्च के हिसाब से देखा जाए तो सीएनजी कार और इलेक्ट्रिक कार एक दूसरे को टक्कर देती ही नजर आ रही हैं।

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Written by साजन चौहान, अपडेटेड: 4 दिसंबर 2022 12:56 IST
ख़ास बातें
  • सीएनजी और इलेक्ट्रिक कारों के फायदे और नुकसान क्या हैं।
  • सीएनजी कार में ग्राहकों को बूट की स्पेस की कमी से जूझना पड़ता है।
  • केंद्र सरकार और राज्य सराकारों द्वारा सब्सिडी भी मिलती है।

Photo Credit: Tata Motors

प्रदूषण को कम करने के लिए और रोजाना के फ्यूल की लागत को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक कारों का विकल्प सामने आ रहा है। ऐसे में जब किसी नई इलेक्ट्रिक कार की कीमत आमतौर पर आने वाली नॉर्मल पेट्रोल-डीजल से चलने वाली कारों के मुकाबले काफी ज्यादा है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल आता है कि इतना ज्यादा खर्च करने से बेहतर है कि हम सीएनजी वाले ऑप्शन पर जाएं, क्योंकि इससे भी प्रदूषण कम होता है और यह चलाने में भी पेट्रोल-डीजल की कारों के मुकाबले किफायती हैं। अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं तो हम आपको बता रहे हैं कि सीएनजी और इलेक्ट्रिक कारों के फायदे और नुकसान क्या हैं।

जब से पेट्रोल के दाम बढ़े हैं और डीजल की कारों की सीमा 10 साल की गई है तो उसके बाद से लोगों ने सीएनजी कारों को खरीद पर ज्यादा जोर दिया है।

CNG कारों के फायदे:
सीएनजी कार कंप्रेस्ड नेचुरल गैस पर चलती हैं जो कि भारत में काफी समय से मौजूद हैं।
सीएनजी कारों के इस्तेमाल पर जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता में कमी होती है और चलाने की लागत कम रहती है। 
सीएनजी की कीमत पेट्रोल और ईंधन की कीमतों से काफी कम है। 
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सीएनजी कारों में पेट्रोल या डीजल पर चलाने का ऑप्शन भी मिलता है। ऐसे में सीएनजी खत्म होने पर कार के रुकने का डर नहीं रहता है।
सीएनजी कारें पेट्रोल या डीजल के मुकाबले कम प्रदूषण करती हैं।

CNG कारों के नुकसान:
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सीएनजी कार में ग्राहकों को बूट की स्पेस की कमी से जूझना पड़ता है, क्योंकि सीएनजी किट और सिलेंडर बूट स्पेस का बड़ा हिस्सा कवर करती है।
सीएनजी देश भर में बड़े स्तर पर हर जगह उपलब्ध नहीं है तो आप सिर्फ सीएनजी पर निर्भर भी नहीं हो सकते हैं।
सीएनजी का इस्तेमाल करने पर आमतौर पर परफॉर्मेंस पर काफी असर होता है।
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सीएनजी कारें आमतौर पर पेट्रोल मॉडल के मुकाबले महंगी आती हैं। अगर बाहर से किट लगवाई जाती है तब थोड़ी बचत हो सकती है।

इलेक्ट्रिक कारों के फायदे:
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भारत में ईवी को हाल ही में बढ़ावा मिला, क्योंकि कई राज्यों ने इलेक्ट्रिक वाहन नीतियों की घोषणा की।
फिलहाल ईवी खरीदने पर केंद्र सरकार और राज्य सराकारों द्वारा सब्सिडी भी मिलती है।
EV खरीदने पर कुछ जगहों पर RTO फीस या रोड टैक्स नहीं लगता है।
इलेक्ट्रिक वाहन चलाने में काफी ज्यादा सस्ते होते हैं क्योंकि ईवी की रनिंग कॉस्ट एक रुपये से भी कम है। यह सीएनजी वाहन से भी ज्यादा किफायती है।
इलेक्ट्रिक वाहनों का मेंटेनेंस बेहद कम होता है, क्योंकि इनकी सामान्य रूप से सर्विस की जरूरत नहीं होती है।
ईवी चलाने पर ध्वनि प्रदूषण और वायु प्रदूषण दोनों नहीं होता है।
ईवी पर्यावरण के अनुकूल हैं।

इलेक्ट्रिक कारों के नुकसान:
जब बात इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत की होती है तो यह काफी महंगी साबित होती हैं।
बैटरी की अधिक कॉस्ट के चलते इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत सामान्य कारों की तुलना में अधिक है। 
इलेक्ट्रिक वाहनों की रेंज उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि बैटरी खत्म होने पर आपकी कार बिलकुल रुक जाएगी।
फ्यूल आप आसानी से भरवा सकते हैं, लेकिन EV चार्जिंग स्टेशन खोजना आसान नहीं है। बड़े शहरों में ये मिल भी जाएं, लेकिन छोटे शहरों में इनका मिलना भी नामुमकिन है।
अधिकतर इलेक्ट्रिक कार सिंगल चार्ज में 400 किमी से कम की रेंज प्रदान करते हैं, जिससे लंबी दूरी की ड्राइविंग के लिए इनका इस्तेमाल मुश्किल है।

निष्कर्ष की बात करें तो भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल ही पर्यावरण के अनुकूल नजर आ रहा है। मगर फिलहाल के लिए अगर लागत और खर्च के हिसाब से देखा जाए तो सीएनजी कार और इलेक्ट्रिक कार एक दूसरे को टक्कर देती ही नजर आ रही हैं।
 

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