कामयाबी : भारत के ‘पुष्‍पक’ विमान की तीसरी बार सफल लैंडिंग, क्‍या है RLV? जानें

ISRO RLV 3rd landig : तीसरी लैंडिंग के दौरान RLV ने ज्‍यादा मुश्किल हालात में लैंड करने की अपनी काबिलियत को दिखाया।

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Written by प्रेम त्रिपाठी, अपडेटेड: 24 जून 2024 13:31 IST
ख़ास बातें
  • रीयूजेबल लॉन्‍च वीकल को तीसरी बार किया गया टेस्‍ट
  • भारतीय स्‍पेस एजेंसी ने की टेस्टिंग
  • तीसरे लैंडिंग टेस्‍ट को किया गया पूरा

इस बार RLV को 500 मीटर की ऊंचाई से ज्‍यादा तेज हवाओं के बीच लैंड कराया गया।

Photo Credit: ISRO

ISRO RLV 3rd landing : भारत के ‘पुष्‍पक' विमान यानी रीयूजेबल लॉन्‍च वीकल (RLV) की तीसरी बार सफल लैंडिग की गई है। भारतीय स्‍पेस एजेंसी इसरो (ISRO) ने रविवार को यह जानकारी शेयर की। पीटीआई भाषा के अनुसार, तीसरी लैंडिंग के दौरान RLV ने ज्‍यादा मुश्किल हालात में लैंड करने की अपनी काबिलियत को दिखाया। इस कामयाबी ने इसरो ने नई उम्‍मीद दी है। कहा जाता है कि RLV एक तरह का स्‍पेस शटल है। जब यह तैयार हो जाएगा तो इसकी मदद से स्‍पेस में सैटेलाइट्स और कार्गो को पहुंचाया जाएगा।

रविवार को किए गए प्रयोग का नाम लैंडिंग एक्सपेरिमेंट (एलईएक्स-03) था। यह टेस्टिंग कर्नाटक के चित्रदुर्ग में एयरोनॉटिकल टेस्ट रेंज (एटीआर) से भारतीय समयानुसार सुबह सात बजकर 10 मिनट पर की गई। 
 

रिपोर्ट के अनुसार, इसरो ने बताया है कि आरएलवी एलईएक्स-03 टेस्टिंग के दौरान रीयूजेबल वीकल ने ज्‍यादा मुश्किल हालात में लैंडिंग क्षमताओं को दिखाया। इस बार RLV को 500 मीटर की ऊंचाई से ज्‍यादा तेज हवाओं के बीच लैंड कराया गया। सेकंड टेस्‍ट के दौरान इसे 150 मीटर की ऊंचाई से लैंड कराया गया था। 

RLV यानी ‘पुष्पक' को रनवे से 4.5 किलोमीटर दूर भारतीय वायुसेना के चिनूक हेलीकॉप्टर से छोड़ा गया। पुष्पक रनवे के पास पहुंचा और उसने सफल लैंडिंग की। इस मिशन को विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) इंडियन एयरफोर्स, आईआईटी कानपुर और एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने मिलकर पूरा किया। इसरो अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने इस जटिल मिशन में सफलता का सिलसिला बरकरार रखने के लिए टीम को बधाई दी।
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क्‍या काम करेगा पुष्‍पक?

पुष्पक विमान के नाम से पॉपुलर RLV एक तरह का स्‍पेस शटल है। जब यह तैयार हो जाएगा तो इसकी मदद से स्‍पेस में सैटेलाइट्स और कार्गो को पहुंचाया जाएगा। इसे पूरी तरह से देश में डेवलप किया जा रहा है। जब इसका बड़ा वर्जन रेडी हो जाएगा तो उससे अंतरिक्ष में पहुंचने की उम्‍मीदें बढ़ जाएंगी। रीयूजेबल लॉन्‍च वीकल के होने से भारत का स्‍पेस लॉन्‍च में होने वाला खर्च कम हो सकता है। 
 
 

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