क्या AI आपको गलत बातों पर यकीन दिला रहा है? ये नई रिसर्च आपके होश उड़ा देगी!

नई रिसर्च में दावा किया गया है कि AI चैटबॉट्स का ज्यादा सहमत होने वाला व्यवहार यूजर्स को गलत बातों पर भरोसा दिला सकता है।

विज्ञापन
Written by नितेश पपनोई, अपडेटेड: 3 अप्रैल 2026 17:13 IST
ख़ास बातें
  • AI चैटबॉट्स का sycophancy व्यवहार यूजर्स को गुमराह कर सकता है
  • “delusional spiraling” में यूजर गलत बातों पर यकीन करने लगता है
  • मौजूदा AI सेफ्टी सॉल्यूशंस इस समस्या को पूरी तरह रोक नहीं पाए

Photo Credit: Unsplash/ Vitaly Gariev

AI चैटबॉट्स को लेकर एक नई रिसर्च में बड़ा दावा सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि ये टूल्स यूजर्स को गलत बातों पर भी जरूरत से ज्यादा भरोसा करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। Sycophantic Chatbots Cause Delusional Spiraling, Even in Ideal Bayesians नाम की इस स्टडी में बताया गया है कि चैटबॉट्स का “साइकोफैंसी” यानी यूजर की बात से सहमत होने का व्यवहार एक तरह का खतरनाक लूप बना सकता है। इसके चलते यूजर्स धीरे-धीरे ऐसी बातों पर भी यकीन करने लगते हैं जो वास्तविकता से दूर होती हैं। रिसर्च के मुताबिक यह समस्या सिर्फ कमजोर या भ्रमित लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी तरह तार्किक सोच रखने वाले यूजर्स भी इसका शिकार हो सकते हैं।

“Delusional Spiraling" क्या है?

स्टडी में इस पूरे प्रोसेस को “delusional spiraling” कहा गया है। इसमें यूजर कोई आइडिया या सवाल रखता है, और चैटबॉट उससे सहमत हो जाता है। फिर यूजर उसी बात को और मजबूत तरीके से पूछता है और चैटबॉट फिर सहमति देता है। इस तरह एक फीडबैक लूप बन जाता है, जिसमें यूजर का आत्मविश्वास लगातार बढ़ता रहता है, भले ही वह गलत दिशा में जा रहा हो।

क्यों होता है ऐसा?

रिसर्च पेपर के मुताबिक, आज के ज्यादातर AI चैटबॉट्स इस तरह ट्रेन किए जाते हैं कि वे यूजर को “संतुष्ट” रखें। यानी वे ऐसी प्रतिक्रियाएं देते हैं जो यूजर को पसंद आएं या उनसे सहमति जताएं। इसी रवैये को “sycophancy” कहा जाता है। रिसर्च में बताया गया है कि यही चीज धीरे-धीरे यूजर के गलत विश्वास को मजबूत कर सकती है और उसे एक तरह के भ्रम में ले जा सकता है।

क्या सॉल्यूशन काम करते हैं?

दिलचस्प बात यह है कि रिसर्च में कुछ संभावित सॉल्यूशंस को भी टेस्ट किया गया, जैसे कि चैटबॉट्स को गलत जानकारी देने से रोकना या यूजर्स को पहले से चेतावनी देना। लेकिन स्टडी के अनुसार ये उपाय इस समस्या को पूरी तरह खत्म नहीं कर पाए। यानी अगर चैटबॉट का व्यवहार ज्यादा सहमत होने वाला है, तो जोखिम बना रहता है।

क्यों है ये चिंता की बात?

रिसर्च में कहा गया है कि जैसे-जैसे लोग सलाह, बातचीत और फैसलों के लिए AI चैटबॉट्स पर निर्भर हो रहे हैं, यह समस्या और गंभीर हो सकती है। अगर यूजर को लगातार “सही” महसूस कराया जाता है, तो वह अपनी सोच को चुनौती देना बंद कर सकता है, जो लंबे समय में गलत फैसलों या खतरनाक रिजल्ट्स तक ले जा सकता है।

लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स 360 एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें।

Nitesh has almost seven years of experience in news writing and reviewing tech ...और भी
Advertisement
Popular Brands
#ट्रेंडिंग टेक न्यूज़
  1. LPG गैस के बिना भी बना सकते हैं खाना, ये 4 विकल्प आएंगे आपके काम
  2. ईरान और रूस में ड्रोन खरीदने के लिए हो रहा क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल
  3. iPhone 17 Pro Max खरीदें 47 हजार तक सस्ता! Apple की 50वीं वर्षगांठ पर धमाका ऑफर
  4. Infinix GT 50 Pro होगा धांसू गेमिंग फोन, यूनीक डिजाइन के साथ फीचर्स लीक
  5. Oppo F33 सीरीज होगी अप्रैल में लॉन्च, कीमत का हुआ खुलासा, जानें सबकुछ
#ताज़ा ख़बरें
  1. Haier ने भारत में नए हैवी ड्यूटी Desert Rose AC किए लॉन्च, जानें कीमत और फीचर्स
  2. Infinix GT 50 Pro होगा धांसू गेमिंग फोन, यूनीक डिजाइन के साथ फीचर्स लीक
  3. GTA में फ्री पुलिस कार! ऐसे पाएं Bravado Buffalo STX और ढेर सारे रिवॉडर्स्
  4. OTP का जमाना गया? बैंक और टेलीकॉम ला रहे हैं नया साइलेंट सिस्टम, फ्रॉड पर लगेगा ब्रेक!
  5. Oppo Find X9 Ultra में मिल सकती है 7,050mAh की बैटरी, 200 मेगापिक्सल टेलीफोटो कैमरा
  6. महंगे हो रहे स्मार्टफोन! Xiaomi ने बताई असली वजह
  7. LPG गैस के बिना भी बना सकते हैं खाना, ये 4 विकल्प आएंगे आपके काम
  8. क्या AI आपको गलत बातों पर यकीन दिला रहा है? ये नई रिसर्च आपके होश उड़ा देगी!
  9. Vivo T5 Pro 5G जल्द होगा भारत में लॉन्च, 9,020mAh की बैटरी 
  10. Artemis II: चांद मिशन में क्या खाएंगे एस्ट्रोनॉट? फ्रिज नहीं, ताजा खाना नहीं... NASA ने बताया पूरा सिस्टम
Download Our Apps
Available in Hindi
© Copyright Red Pixels Ventures Limited 2026. All rights reserved.