नया Android या iPhone खरीदने के बाद ऐप्स डाउनलोड करने से पहले इन 7 जरूरी Settings को जरूर चेक करें।
नया फोन सेटअप करते समय इन जरूरी Settings को जरूर चेक करें
नया स्मार्टफोन खरीदते ही हम आमतौर पर उसमें WhatsApp, Instagram, YouTube और बाकी जरूरी ऐप्स डाउनलोड करने लगते हैं। लेकिन फोन को इस्तेमाल करने से पहले कुछ जरूरी सेटिंग्स बदलना भी उतना ही जरूरी है। इसकी वजह सिर्फ बैटरी बचाना नहीं है, बल्कि प्राइवेसी, सिक्योरिटी, नोटिफिकेशन और फोन खो जाने की स्थिति में डेटा को सुरक्षित रखना भी है। Android और iPhone दोनों में कई ऐसे ऑप्शन मिलते हैं जिन्हें डिफॉल्ट सेटिंग पर छोड़ने के बजाय अपनी जरूरत के हिसाब से सेट करना बेहतर रहता है। इसलिए अगर आपने नया फोन खरीदा है, तो ऐप्स इंस्टॉल करने से पहले इन 7 सेटिंग्स को जरूर चेक कर लें।
नए फोन में सबसे पहले मजबूत स्क्रीन लॉक लगाएं। सिर्फ आसान PIN जैसे 1234 या जन्मतिथि इस्तेमाल करने से बचें। अगर फोन में Fingerprint या Face Unlock दिया गया है तो उसे भी सेट कर लें। Android में स्क्रीन लॉक लगाने से डिवाइस की सुरक्षा बढ़ती है और चोरी होने की स्थिति में कोई दूसरा व्यक्ति फोन को आसानी से इस्तेमाल नहीं कर पाता।
iPhone में भी Face ID या Touch ID के साथ पासकोड सेट किया जा सकता है। Apple के मुताबिक Face ID और Touch ID का डेटा डिवाइस से बाहर नहीं जाता।
फोन गुम या चोरी होने पर सबसे ज्यादा काम आने वाली सेटिंग यही है। Android फोन में Google का Find Hub और iPhone में Find My फीचर इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे डिवाइस की लोकेशन खोजने और जरूरत पड़ने पर उसे सुरक्षित करने में मदद मिलती है। Google के मुताबिक खोए हुए Android डिवाइस को ढूंढने और उसे रिमोटली सुरक्षित करने के लिए संबंधित फीचर्स उपलब्ध हैं। नया फोन खरीदने के तुरंत बाद इसे चेक कर लेना इसलिए जरूरी है, क्योंकि फोन खोने के बाद इसे सेट करने का मौका नहीं मिलता।
आपके फोन पर आने वाले OTP, बैंक मैसेज और निजी WhatsApp संदेश लॉक स्क्रीन पर दिखाई देते हैं तो कोई भी पास में खड़ा व्यक्ति उन्हें पढ़ सकता है। इसलिए Lock Screen Notifications में जाकर संवेदनशील मैसेज का पूरा कंटेंट दिखाने वाला ऑप्शन बंद कर दें। Android में Notification की Lock Screen सेटिंग के जरिए यह तय किया जा सकता है कि लॉक फोन पर नोटिफिकेशन का कंटेंट कितना दिखे। Google भी निजी जानकारी को लॉक स्क्रीन पर दिखने से रोकने की सलाह देता है।
नया फोन सेटअप करते समय कई ऐप्स Camera, Microphone, Location, Contacts और दूसरे डेटा की परमिशन मांगते हैं। हर जगह बिना सोचे "Allow" दबाने की जरूरत नहीं है। जिस ऐप को जिस परमिशन की वास्तव में जरूरत हो, सिर्फ वही दें। Android में Privacy Dashboard के जरिए आप देख सकते हैं कि कौन-सा ऐप Camera, Microphone या Location जैसी परमिशन का इस्तेमाल कर रहा है। जरूरत न होने पर वहीं से परमिशन बदली जा सकती है।
नए फोन में बैटरी सेटिंग्स को भी एक बार जरूर देख लें। Auto-Brightness, Adaptive Battery और ज्यादा बैटरी इस्तेमाल करने वाले ऐप्स की जानकारी यहां मिल सकती है। Android में Adaptive Battery और बैकग्राउंड में ज्यादा बैटरी खर्च करने वाले ऐप्स को सीमित करने जैसे विकल्प मिलते हैं।
iPhone में भी Settings के Battery सेक्शन में Battery Suggestions और Insights मिल सकते हैं, जिनसे ज्यादा बैटरी खर्च होने की वजह पता चल सकती है।
नया फोन मिलने के बाद सॉफ्टवेयर और सिक्योरिटी अपडेट्स को नजरअंदाज न करें। फोन सेटअप करने के बाद Settings में जाकर देखें कि सिस्टम और ऐप्स के लिए Automatic Updates उपलब्ध हैं या नहीं। नए अपडेट में सिर्फ नए फीचर्स ही नहीं, बल्कि सुरक्षा से जुड़े सुधार भी शामिल हो सकते हैं। Google के मुताबिक Android डिवाइस का सुरक्षा अपडेट लेवल यह तय करने में भी इस्तेमाल होता है कि डिवाइस को नया अपडेट या सिक्योरिटी पैच चाहिए या नहीं।
नए फोन में Google Account या iCloud से Backup सेट करना सबसे जरूरी शुरुआती कामों में से एक है। फोन खराब होने, चोरी होने या अचानक Reset करने की जरूरत पड़ने पर Backup आपके डेटा को वापस पाने में मदद कर सकता है। Android के सेटअप प्रोसेस में पुराने फोन से Apps, Contacts, Photos, Videos और कई दूसरी चीजें नए फोन में ट्रांसफर की जा सकती हैं। वहीं iPhone में iCloud के जरिए जरूरी जानकारी को सुरक्षित रखकर नए या बदले हुए डिवाइस पर वापस इस्तेमाल किया जा सकता है।
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