चीन TMS-10 नाम के सुपरसोनिक विमान पर काम कर रहा है, जिसे Mach 2 की रफ्तार के लिए विकसित किया जा रहा है। जानें कैसे Low-Boom टेक्नोलॉजी भविष्य के हवाई सफर को बदल सकती है।
चीन का TMS-10 सुपरसोनिक विमान Mach 2 की रफ्तार के लिए तैयार हो रहा है
Photo Credit: Tianmushan Laboratory
सोचिए, बीजिंग से शंघाई जैसे करीब 1,000 किलोमीटर के सफर में आपको करीब 2 घंटे की जगह सिर्फ 30 मिनट लगें। यह सुनने में भले ही किसी साइंस-फिक्शन फिल्म जैसा लगे, लेकिन चीन इसी दिशा में एक नए सुपरसोनिक यात्री विमान पर काम कर रहा है। इसका नाम TMS-10 है और फिलहाल यह एक तकनीकी प्रदर्शन विमान है। इसका मकसद सिर्फ तेज उड़ना नहीं, बल्कि सुपरसोनिक उड़ान के दौरान पैदा होने वाली तेज आवाज यानी Sonic Boom को भी कम करना है। विमान अब अंतिम असेंबली के फेज में पहुंच चुका है और 2026 के अंत तक सुपरसोनिक टेस्ट फ्लाइट की तैयारी है।
TMS-10 को चीन की Tianmushan Laboratory डेवलप कर रही है। यह अभी कोई ऐसा यात्री विमान (Passenger Plane) नहीं है जिसमें आम लोग बैठकर सफर कर सकें। इसे एक Demonstrator Aircraft के तौर पर तैयार किया जा रहा है, ताकि सुपरसोनिक उड़ान से जुड़ी तकनीकों को परखा जा सके। इसकी पहली सुपरसोनिक टेस्ट फ्लाइट 2026 के अंत तक करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस प्रोजेक्ट का अगला लक्ष्य ऐसी तकनीक डेवलप करना है जिसे भविष्य में बड़े यात्री विमान में इस्तेमाल किया जा सके। रिपोर्ट्स के मुताबिक भविष्य के इस तरह के विमान में करीब 10 से 15 यात्री बैठ सकते हैं और इसकी रफ्तार Mach 2 तक पहुंच सकती है, यानी आवाज की रफ्तार से करीब दोगुनी।
सुपरसोनिक प्लेन की सबसे बड़ी खासियत इसकी रफ्तार होती है। सामान्य पैसेंजर प्लेन आमतौर पर आवाज की रफ्तार से काफी कम स्पीड पर उड़ते हैं, जबकि सुपरसोनिक विमान Mach 1 से ज्यादा रफ्तार से उड़ता है। TMS-10 से जुड़ी रिपोर्ट्स में Mach 2 की क्षमता का लक्ष्य बताया गया है। अगर भविष्य में इसी तकनीक पर आधारित यात्री विमान डेवलप होता है, तो बीजिंग-शंघाई की करीब 1,000 किलोमीटर दूरी लगभग 30 मिनट में पूरी करने की संभावना बताई गई है, भारत में इसे उदाहरण के रूप में दिल्ली से पुणे का सफर माना जा सकता है।
सुपरसोनिक विमान बनाने में सबसे बड़ी दिक्कतों में से एक Sonic Boom है। जब विमान आवाज की रफ्तार से तेज उड़ता है, तो उसके आसपास बनने वाली शॉक वेव जमीन तक तेज धमाके जैसी आवाज पहुंचा सकती है। यही वजह है कि जमीन के ऊपर सुपरसोनिक यात्री उड़ानों को लेकर लंबे समय से शोर और नियमों की समस्या रही है।
TMS-10 में इसी समस्या को कम करने के लिए Low-Boom डिजाइन पर काम किया जा रहा है। इसका मकसद शॉक वेव को एक जगह केंद्रित होने देने के बजाय इस तरह कंट्रोल करना है कि जमीन पर पहुंचने वाली आवाज काफी कम हो। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन के इस परीक्षण विमान का लक्ष्य Sonic Boom को करीब 80 डेसिबल तक सीमित करना है।
नहीं। यह सबसे जरूरी बात है। TMS-10 अभी यात्री विमान नहीं है। फिलहाल इसका इस्तेमाल तकनीक को परखने के लिए किया जा रहा है। पहले इसे सुपरसोनिक गति पर स्थिर तरीके से उड़ाकर देखा जाएगा और Low-Boom तकनीक की क्षमता जांची जाएगी। इसके बाद ही ऐसी तकनीक को बड़े यात्री विमान में इस्तेमाल करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
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