गुजरात के इन पर्यटन स्थलों पर सेल्फी लेने से जाना पड़ सकता है जेल, या देना पड़ेगा इतना जुर्माना...

भारत के जर्नल ऑफ फैमिली मेडिसिन एंड प्राइमरी केयर द्वारा 2019 के एक अध्ययन से पता चला था कि भारत में सेल्फी से होने वाली मौतें एक गंभीर मुद्दा है

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गैजेट्स 360 स्टाफ, अपडेटेड: 29 अगस्त 2021 12:20 IST
ख़ास बातें
  • Gujarat के कई स्थलों को 'No Selfie Zone' बना दिया गया है
  • सेल्फी लेते पकड़े जाने पर भारी जुर्माना या हो सकती है 1 महीने की जेल
  • सेल्फी से होने वाली मौतों पर रोक लगाने के लिए लिया गया है फैसला

2019 के एक अध्ययन से पता चला था कि भारत में सेल्फी से होने वाली मौतें एक गंभीर मुद्दा है

गुजरात ने कथित तौर पर राज्य के एकमात्र हिल स्टेशन सापुतारा (Saputara) और साथ ही डांग जिले के अन्य पर्यटन स्थलों को 'नो-सेल्फी' ज़ोन बना दिया है। यह फैसला सुरक्षा के लिहाज से लिया गया है, क्योंकि भारत बड़े अंतर के साथ दुनिया की सेल्फी-डेथ कैपिटल है और अधिकारियों को लगता है कि यदि वे लोगों को अपनी आसपास के वातावरण को लेकर ज्यादा जागरूक नहीं बना सकते हैं, तो सेल्फी पर प्रतिबंध लगाना एक बेहतर कदम हो सकता है। एक समाचार रिपोर्ट के अनुसार, लोग अक्सर अपनी सेल्फी में एक अच्छा व्यू लाने के लिए जान का जोखिम उठा बैठते हैं और खतरनाक स्थानों पर चढ़ जाते हैं और इस प्रक्रिया में कई लोगों की जान पर बन आती है।

यदि अधिकारी आपको ऊपर बताए पर्यटन स्थलों पर सेल्फी लेते हुए पकड़ते हैं, तो आपको 200 रुपये तक का जुर्माना देना होगा या रिपोर्ट के अनुसार, आपको एक महीने की जेल की सजा काटनी पड़ सकती है। सेल्फी से होने वाली मौतों का आंकड़ा जिले के अधिकारियों के लिए चिंता का विषय बनना शुरू हो गया था, कई घटनाओं में लोगों द्वारा खुद को फोटो खिंचवाने के दौरान पहाड़ियों से गिरने की घटनाएं सामने आईं थी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट टी के डामोर (T K Damor) ने डांग में पर्यटन स्थलों को 'नो सेल्फी' ज़ोन बनाने की अधिसूचना जारी की। अधिसूचना के अनुसार, उल्लंघन करने वालों को 1 महीने की जेल की सजा भुगतनी होगी या 200 रुपये तक का जुर्माना देना होगा। हर साल, मानसून के दौरान सापुतारा पर कई पर्यटकों के कदम पड़ते हैं और भीड़ काफी बढ़ जाती है। इस हिल स्टेशन में घने जंगल और कई झरने भी हैं।

भारत के जर्नल ऑफ फैमिली मेडिसिन एंड प्राइमरी केयर द्वारा 2019 के एक अध्ययन से पता चला था कि भारत में सेल्फी से होने वाली मौतें एक गंभीर मुद्दा है, जिसमें पाया गया कि अक्टूबर 2011 और नवंबर 2017 के बीच सेल्फी ने शार्क के हमलों की तुलना में पांच गुना अधिक लोगों की जान ली। इस अवधि में सेल्फी लेने के दौरान मरने वाले 259 लोगों की तुलना में केवल 50 लोग शार्क के हमले में मारे गए थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि स्मार्टफोन की पहुंच और सेल्फी-स्टिक्स का क्रेज बढ़ने के साथ, हर साल मौतों की संख्या में वृद्धि हुई है। यह केवल भारत की ही नहीं, बल्कि रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका सहित दुनिया के अन्य कई हिस्सों में एक बड़ी समस्या है।
 

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