दिल्ली में ₹2.10 करोड़ की डिजिटल अरेस्ट ठगी के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जानें बैंक अकाउंट में ठगी के पैसे आने पर क्या हो सकता है और ऐसे स्कैम से कैसे बचें।
दिल्ली में डिजिटल अरेस्ट ठगी के मामले में गिरफ्तारी के बाद बैंक अकाउंट के इस्तेमाल पर सवाल उठे
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देश में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी के मामले सामने आ रहे हैं। अब दिल्ली पुलिस ने करीब 2.10 करोड़ रुपये की ऐसी ही ठगी से जुड़े मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इन लोगों ने ऐसे बैंक अकाउंट को ऑपरेट किया, जिसमें फ्रॉड की रकम का एक हिस्सा आया था। इस अकाउंट में 98,592 रुपये जमा हुए थे। जांच में सामने आया कि रकम का एक हिस्सा उसी दिन निकाल लिया गया। यह मामला दिखाता है कि साइबर ठगी में सिर्फ लोगों को फोन करके डराने वाले ही नहीं, बल्कि ठगी की रकम को अपने बैंक अकाउंट में लेने और आगे भेजने वाले लोग भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या है और इससे कैसे बचा जा सकता है।
दिल्ली पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड के मामले में सोनू खान और अर्जुन चौधरी नाम के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, दोनों का संबंध ऐसे बैंक अकाउंट से था, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड से जुड़ी रकम हासिल करने के लिए किया गया। आरोपियों के पास से चार मोबाइल फोन, छह डेबिट कार्ड और 10 चेकबुक बरामद हुई हैं।
पुलिस की जांच के मुताबिक, यमुना विहार में ऑपरेट हो रहे एक बैंक अकाउंट में 12 अक्टूबर को 98,592 रुपये आए थे। इसमें से 49,000 रुपये उसी दिन निकाल लिए गए, जबकि बाकी रकम चेक के जरिए निकाली गई। जांच में इस लेनदेन का संबंध जनकपुरी के एक निवासी से हुई करीब 2.10 करोड़ रुपये की साइबर फ्रॉड से जुड़ा मिला। पुलिस का आरोप है कि सोनू खान के बैंक अकाउंट्स का कंट्रोल अर्जुन चौधरी के पास था।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम में साइबर ठग खुद को पुलिस, CBI, कस्टम, टेलीकॉम विभाग या किसी दूसरी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते हैं। वे दावा कर सकते हैं कि पीड़ित के आधार कार्ड, मोबाइल नंबर या बैंक अकाउंट का इस्तेमाल किसी गैरकानूनी एक्टिविटी में हुआ है। इसके बाद गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जाता है।
कई मामलों में ठग वीडियो कॉल पर पीड़ित को लगातार अपने सामने रहने के लिए कहते हैं। वे नकली पुलिस स्टेशन या सरकारी कार्यालय जैसा माहौल दिखाकर लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश भी कर सकते हैं। गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाली साइबर क्राइम एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई प्रक्रिया नहीं है।
अगर कोई व्यक्ति फोन या वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर गिरफ्तारी की धमकी देता है और पैसे ट्रांसफर करने को कहता है, तो घबराकर कोई कदम न उठाएं। कॉल करने वाले की बात पर भरोसा करने के बजाय संबंधित विभाग के आधिकारिक कॉन्टैक्ट्स पर संपर्क करें।
ध्यान रखें कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने बैंक अकाउंट में पैसे न मंगवाएं और न ही उन पैसों को दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर करें। अपना बैंक अकाउंट, डेबिट कार्ड, चेकबुक, OTP या बैंकिंग से जुड़ी जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए न दें। किसी को कमीशन मिलने या आर्थिक मदद के बदले बैंक अकाउंट यूज करने देने का ऑफर भी जोखिम भरा हो सकता है।
अगर आपके पास कोई संदिग्ध कॉल आती है, तो कॉल करने वाले के दबाव में आकर पैसे न भेजें। यदि ठगी हो चुकी है या पैसे ट्रांसफर कर दिए हैं, तो तुरंत अपने बैंक को सूचित करें और साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें। शिकायत राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी दर्ज की जा सकती है। जल्द शिकायत करने से संबंधित बैंक अकाउंट और ट्रांजैक्शन की जांच में मदद मिल सकती है।
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