रैनसमवेयर ग्रुप World Leaks ने भारत के सबसे बड़े कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट से जुड़े कथित 19 हजार संवेदनशील डॉक्यूमेंट्स डार्क वेब पर अपलोड किए हैं।
कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लांट से जुड़े कथित डॉक्यूमेंट्स डार्क वेब पर होने का दावा
Photo Credit: Unsplash/ Desola Lanre-Ologun
भारत के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Nuclear Power Plant) कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट (KKNPP) से जुड़े कथित संवेदनशील डॉक्यूमेंट्स डार्क वेब पर लीक होने का दावा किया गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, रैनसमवेयर ग्रुप World Leaks ने डार्क वेब पर करीब 19,000 फाइलें अपलोड की हैं। इन फाइलों में प्लांट के कुछ हिस्सों के कथित ब्लूप्रिंट, सप्लायर्स की जानकारी, मीटिंग रिकॉर्ड और अन्य डॉक्यूमेंट्स शामिल होने का दावा किया गया है। हालांकि, रिपोर्ट में इन डॉक्यूमेंट्स की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, World Leaks ने इन डॉक्यूमेंट्स को Reliance Group से जुड़ा डेटा बताया है। इस मामले पर रिलायंस ग्रुप ने बयान जारी कर कहा कि थर्ड-पार्टी के डेटा सेंटर सर्विस प्रोवाइडर Yotta के सर्वर पर मौजूद उसके डेटा में पार्शियल ब्रीच की घटना हुई है। कंपनी ने बताया कि इस घटना की जानकारी सरकार को दे दी गई है। हालांकि, ग्रुप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि आखिर कौन-सा डेटा प्रभावित हुआ है।
रॉयटर्स ने जिन डॉक्यूमेंट्स को रिव्यू किया, वे 2016 से लेकर 2025 के मध्य तक की अवधि के बताए गए हैं। इनमें कथित तौर पर प्लांट के कुछ ब्लूप्रिंट, इक्विपमेंट्स के रिव्यू, निरीक्षण और मीटिंग रिकॉर्ड, इंश्योरेंस डॉक्यूमेंट्स और सप्लायर से जुड़ी जानकारी शामिल है। World Leaks की वेबसाइट पर Reliance Group से जुड़ी कुल 8.58 लाख फाइलें मौजूद बताई गई हैं, जिनमें से लगभग 19,000 फाइलों को सबसे सेंसेटिव बताया गया है।
कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट तमिलनाडु में स्थित है और यह भारत के सात न्यूक्लियर पावर प्लांट में सबसे बड़ा है। यह केंद्र सरकार की न्यूक्लियर कैपेसिटी बढ़ाने की योजना का भी अहम हिस्सा माना जाता है। रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर्स को साल 2018 में प्लांट की यूनिट-3 और यूनिट-4 के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर डिजाइन और निर्माण का ठेका मिला था।
World Leaks का नाम इससे पहले भी सुर्खियों में आ चुका है। जून में इस रैनसमवेयर ग्रुप ने दावा किया था कि उसने Tata Group से जुड़े डेटा के बदले 15 लाख डॉलर की फिरौती मांगी थी। उस समय ग्रुप ने कहा था कि मांग पूरी नहीं होने के बाद उसने कथित तौर पर Apple और Tesla से जुड़े सीक्रेट डिजाइन डॉक्यूमेंट्स पब्लिक कर दिए थे।
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