AI कर रहा है 'भेजा फ्राई'? ज्यादा AI टूल्स का यूज आपके लिए खतरा! नई स्टडी में दावा

ऑफिस में तेजी से बढ़ रहे AI टूल्स के इस्तेमाल ने काम करने का तरीका बदल दिया है। लेकिन नई स्टडी बताती है कि एक साथ कई AI सिस्टम को मैनेज करना कर्मचारियों के लिए मानसिक थकान की वजह बन सकता है, जिसे “AI Brain Fry” कहा गया है।

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Written by नितेश पपनोई, अपडेटेड: 10 मार्च 2026 10:55 IST
ख़ास बातें
  • नई स्टडी में सामने आया AI टूल्स से जुड़ा “AI Brain Fry”
  • ज्यादा AI टूल्स मैनेज करने से बढ़ सकती है मानसिक थकान
  • Brain Fry वाले कर्मचारियों में गलतियां और नौकरी छोड़ने की संभावना ज्यादा

एक साथ कई AI टूल्स इस्तेमाल करने से कर्मचारियों में मानसिक थकान बढ़ सकती है

Photo Credit: AI Generated

ऑफिस हो या स्कूल, या रोजमर्रा की लाइफ, लगभग हर जगह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। कोडिंग से लेकर मार्केटिंग, अकाउंटिंग और कंटेंट क्रिएशन तक लगभग हर प्रोफेशन में AI टूल्स शामिल हो चुके हैं। कई कर्मचारी एक साथ कई AI टूल्स का इस्तेमाल भी कर रहे हैं, जिससे काम तेजी से होने की उम्मीद रहती है। हालांकि अब एक नई रिसर्च इस ट्रेंड के दूसरे पहलू की ओर इशारा करती है। रिपोर्ट के मुताबिक लगातार AI टूल्स को मैनेज करना कर्मचारियों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव डाल सकता है। इसी स्थिति को रिसर्च में “AI Brain Fry” कहा गया है, जिसमें व्यक्ति मानसिक थकान और ध्यान केंद्रित करने में मुश्किल जैसी समस्याएं महसूस करता है।

Harvard Business Review में पब्लिश एक नई स्टडी के मुताबिक, रिसर्चर्स ने अमेरिका में 1,488 कर्मचारियों से उनके कार्यस्थल पर AI टूल्स के इस्तेमाल और उसके असर के बारे में जानकारी ली। रिपोर्ट में सामने आया कि कई कर्मचारी एक साथ कई AI सिस्टम को मॉनिटर और मैनेज करते हुए अपनी मानसिक क्षमता की सीमा तक पहुंच जाते हैं, जिससे उन्हें एक अलग तरह की मानसिक थकान महसूस होती है।

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स्टडी में इस स्थिति को “AI Brain Fry” नाम दिया गया है। इसका मतलब है AI टूल्स के लगातार इस्तेमाल और उनकी निगरानी से होने वाली मानसिक थकावट। सर्वे में शामिल करीब 14 प्रतिशत कर्मचारियों ने बताया कि उन्होंने इस तरह की थकान का अनुभव किया। हिस्सा लेने वाले कई व्यक्तियों ने “मेंटल फॉग” या दिमाग में लगातार भनभनाहट जैसी भावना का जिक्र किया, जिसमें फोकस करने में दिक्कत, फैसले लेने में देरी और सिरदर्द जैसी समस्याएं शामिल थीं।

रिपोर्ट यह भी बताती है कि AI Brain Fry पारंपरिक बर्नआउट से अलग है। सामान्य बर्नआउट में भावनात्मक थकान और काम के प्रति नकारात्मक भावना शामिल होती है, जबकि AI Brain Fry मुख्य रूप से कई AI सिस्टम को एक साथ मैनेज करने के मानसिक दबाव से जुड़ा होता है। इसी वजह से यह समस्या अक्सर सामान्य बर्नआउट सर्वे में आसानी से सामने नहीं आती।

जॉब प्रोफाइल के हिसाब से भी इसका असर अलग-अलग देखने को मिला। स्टडी के अनुसार मार्केटिंग सेक्टर में 26 प्रतिशत कर्मचारियों ने AI Brain Fry का अनुभव किया, जो सबसे ज्यादा है। इसके बाद ह्यूमन रिसोर्सेज में 19.3 प्रतिशत और ऑपरेशंस में 17.9 प्रतिशत कर्मचारी प्रभावित पाए गए। सॉफ्टवेयर डेवलपर्स इस सूची में 17.8 प्रतिशत के साथ चौथे स्थान पर रहे, जबकि लीगल प्रोफेशन में यह आंकड़ा केवल 5.6 प्रतिशत रहा। वहीं लीडरशिप और प्रोडक्ट मैनेजमेंट रोल में यह दर करीब 8.6 प्रतिशत दर्ज की गई।

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रिसर्च के मुताबिक जिन कर्मचारियों को ज्यादा AI टूल्स की निगरानी करनी पड़ती है, उन्हें लगभग 14 प्रतिशत ज्यादा मानसिक प्रयास करना पड़ता है और वे 12 प्रतिशत ज्यादा मानसिक थकान महसूस करते हैं। इसके साथ ही ऐसे कर्मचारियों में निर्णय लेने की थकान 33 प्रतिशत तक ज्यादा देखी गई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि AI Brain Fry का अनुभव करने वाले कर्मचारियों से औसतन 11 प्रतिशत ज्यादा छोटी और 39 प्रतिशत ज्यादा बड़ी गलतियां हो सकती हैं।

स्टडी में यह भी सामने आया कि जिन कर्मचारियों पर AI टूल्स के इस्तेमाल का दबाव ज्यादा था और जिन्होंने AI Brain Fry का अनुभव किया, वे नौकरी छोड़ने के बारे में सोचने की संभावना में लगभग 39 प्रतिशत ज्यादा थे। हालांकि रिसर्च यह भी बताती है कि जब AI का इस्तेमाल दोहराव वाले और कम दिलचस्प काम को कम करने के लिए किया जाता है, तो कर्मचारियों में बर्नआउट स्कोर करीब 15 प्रतिशत तक कम देखा गया और उनकी कार्य संतुष्टि भी बेहतर रही।

 

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