स्टडी में इस बात की जांच की गई कि 'भारत ABIS' स्पीड और एक्युरेसी बनाए रखते हुए भारत जैसे अरबों की आबादी वाले बड़े डेटाबेस को कैसे संभालता है।
UIDAI के लिए डुप्लीकेट आधार एक बड़ी समस्या रहा है जिस पर अब काबू पाने का तरीका अथॉरिटी ने ढूंढ निकाला है।
UIDAI के लिए डुप्लीकेट आधार एक बड़ी समस्या रहा है जिस पर अब काबू पाने का तरीका अथॉरिटी ने ढूंढ निकाला है। यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया के शोधकर्ताओं ने भारत एबीआईएस (Bharat ABIS) नाम का एक टूल डेवलप किया है जो आधार के साथ होने वाली छेड़छाड़, डुप्लीकेसी, और कई तरह की समस्याओं को खत्म कर देगा। UIDAI ने इसे 2.2 करोड़ आधार रिकॉर्ड्स के साथ टेस्ट करके देखा है। आइए जानते हैं कैसे काम करेगा नया आधार टूल।
यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) से जुड़े रिसर्चर्स ने 'भारत ABIS' नामक टूल बनाया है जो एक ओपन-सोर्स बायोमेट्रिक वैरिफिकेशन सिस्टम है। मौजूदा सिस्टम के मुकाबले इसे स्पीड और एक्युरेसी के मामले में कहीं बेहतर बताया जा रहा है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, UIDAI के 6 शोधकर्ता इस रिसर्च में शामिल थे जिसे Towards Billion-Scale Multi-modal Biometric Search नाम से कंडक्ट किया गया।
स्टडी में इस बात की जांच की गई कि 'भारत ABIS' स्पीड और एक्युरेसी बनाए रखते हुए भारत जैसे अरबों की आबादी वाले बड़े डेटाबेस को कैसे संभालता है। यानी, यह सिस्टम बड़े डेटाबेस में नई ID को कैसे जोड़ता है, वो भी बिना डुप्लिकेट बनाए या गलत तरीके से एंट्री को फ्लैग किए। यानी डुप्लीकेसी अथॉरिटी के लिए एक समस्या रही है जो नए सिस्टम द्वारा खत्म की जा सकती है। उदाहरण के लिए 2022 में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने 6 लाख डुप्लिकेट आधार कार्ड्स की पहचान करके उन्हें रद्द किया था।
भारत ABIS कैसे काम करता है?
ABIS का मतलब है ऑटोमेटेड बायोमेट्रिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम, और भारत ABIS का मतलब है भारत में किसी व्यक्ति के बायोमीट्रिक को पहचानने वाला सिस्टम। यह सिस्टम व्यक्ति के फिंगरप्रिंट, आइरिस और चेहरे के डेटा को मिलाकर एक सिंगल टेम्प्लेट बनाता है, जिसका साइज 13.5kb होता है। इस टेम्प्लेट को डेटाबेस से मिलाया जाता है ताकि पहले से मौजूद क्रेडेंशियल का पता लगाया जा सके।
सिस्टम खासतौर से बड़े पैमाने पर IDs को संभालता है जिसके लिए इसमें एक शेड्यूलर होता है। यह सर्च वर्क को अलग-अलग सर्वरों पर बांट देता है। यह अलग-अलग बायोमेट्रिक डेटा जैसे सिर्फ फिंगरप्रिंट या सिर्फ आइरिस का भी इस्तेमाल कर सकता है। जब तीनों लेयर्स को मिला दिया जाता है, तो एक्युरेसी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ABIS का 'फॉल्स पॉजिटिव आइडेंटिफिकेशन रेट' (FPIR) 0.1 प्रतिशत है। FPIR उस एरर रेट को बताता है जिसमें सिस्टम गलती से डुप्लिकेट एंट्रीज की पहचान कर सकता है। यानी भारत ABIS में आधार डुप्लीकेसी की संभावना बिल्कुल न के बराबर कही गई है। इससे आधार डुप्लीकेसी पर लगाम लगाने में बहुत अधिक मदद मिलेगी।
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हेमन्त कुमार Gadgets 360 में सीनियर ...और भी