D2M के जरिए बिना मोबाइल डेटा के Smartphone पर Live TV पहुंचाने की योजना पर बड़ा अपडेट आया है। सरकार ने स्मार्टफोन कंपनियों के लिए D2M सपोर्ट वाली खास चिप लगाना अनिवार्य नहीं किया है।
D2M तकनीक के जरिए स्मार्टफोन पर बिना मोबाइल डेटा के Live TV पहुंचाने की योजना पर सरकार का बड़ा अपडेट
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अगर आप आने वाले समय में बिना इंटरनेट और मोबाइल डेटा खर्च किए अपने स्मार्टफोन पर Live TV देखने की उम्मीद कर रहे हैं, तो इससे जुड़ा एक बड़ा अपडेट सामने आया है। भारत सरकार Direct-to-Mobile यानी D2M तकनीक को कमर्शियल तौर पर शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन स्मार्टफोन कंपनियों के लिए फोन में D2M सपोर्ट देने वाली खास चिप या जरूरी हार्डवेयर लगाना अनिवार्य नहीं किया जाएगा। यानी कंपनियां अपनी इच्छा और बाजार में ग्राहकों की मांग के हिसाब से तय कर सकेंगी कि उनके फोन में D2M सपोर्ट देना है या नहीं।
D2M तकनीक का मकसद बिना मोबाइल इंटरनेट के सीधे स्मार्टफोन और दूसरे डिवाइस पर टीवी चैनल और वीडियो कंटेंट पहुंचाना है। इसके लिए मोबाइल नेटवर्क के बजाय ब्रॉडकास्ट सिग्नल का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में यूजर को Live TV देखने के लिए मोबाइल डेटा खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। भारत में D2M के लिए 470-582 MHz बैंड पर काम किया जा रहा है और सरकार इसके कमर्शियल रोलआउट की तैयारी कर रही है।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय यानी MeitY की सिफारिश के बाद स्मार्टफोन कंपनियों के लिए D2M को अनिवार्य करने का रास्ता फिलहाल साफ नहीं है। प्रसार भारती के CEO गौरव द्विवेदी ने भी बताया (via Exhange4media) है कि कंपनियों पर अपने फोन में D2M सिग्नल रिसीव करने वाली चिप लगाने का दबाव नहीं होगा। कुछ कंपनियों ने D2M तकनीक वाले प्रोटोटाइप तैयार किए हैं, लेकिन बाकी कंपनियां बाजार की मांग को देखकर इस सुविधा को अपनाने का फैसला कर सकती हैं।
यही फैसला D2M के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के सामने चुनौती भी खड़ी करता है। अगर कंपनियों को D2M हार्डवेयर लगाने के लिए बाध्य नहीं किया जाता है, तो हर स्मार्टफोन में यह सुविधा मिलना जरूरी नहीं होगा। इससे D2M के लिए बड़ा डिवाइस इकोसिस्टम तैयार होने में समय लग सकता है। दूसरी तरफ, कंपनियां तब ज्यादा तेजी से इसे अपनाने के लिए आगे आ सकती हैं जब उन्हें ग्राहकों की तरफ से इसकी पर्याप्त मांग दिखाई दे।
सरकार की योजना सिर्फ स्मार्टफोन तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक D2M को कमर्शियल स्तर पर शुरू करने के लिए 470-582 MHz स्पेक्ट्रम बैंड के इस्तेमाल और Public-Private Partnership यानी PPP मॉडल को मंजूरी मिल चुकी है। प्रसार भारती इसके लिए जल्द ही RFP यानी टेंडर जारी करने की तैयारी में है। रिपोर्ट के अनुसार यह प्रक्रिया अक्टूबर के अंत तक आगे बढ़ सकती है।
इसका मतलब यह नहीं है कि फोन पर Free Live TV का विचार खत्म हो गया है। D2M तकनीक पर काम जारी है और सरकार इसके कमर्शियल रोलआउट की तरफ बढ़ रही है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि कितनी स्मार्टफोन कंपनियां इसे अपने डिवाइस में अपनाती हैं। अगर पर्याप्त संख्या में फोन D2M सपोर्ट करने लगते हैं, तभी यूजर्स को बिना डेटा खर्च किए Live TV देखने का फायदा बड़े स्तर पर मिल पाएगा।
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